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अपने बच्चों में खान-पान के साथ योग व संस्कार की भी आदत डालें : प्रो. अंचल श्रीवास्तव

विजय श्रीवास्तव
-स्वामी विवेकानन्द जी के जन्मजयन्ती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित
-लेख-चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने लिया प्रतिभाग

वाराणसी। स्वामी विवेकानन्द के जन्मजयन्ती के अवसर पर कायस्थ समिति सारनाथ के तत्वावधान में ‘‘स्वामी विवेकानन्द जीे के विचारों की आज के समय में प्रांसिकता‘ विषयक लेख प्रतियोगिता व चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें तीन दर्जन बच्चांे ने भाग लिया। लेख प्रतियोगिता में जहां सिनियर वर्ग में प्रथम स्थान कोैशिकी श्रीवास्तव द्वितीय स्थान कृपाली श्रीवास्तव वहीं तृतीय स्थान वन्दना श्रीवास्तव को मिला। जबकि जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान इशिता सिंह द्वितीय स्थान अर्पिता श्रीवास्तव व तृतीय स्थान रचित श्रीवास्तव को मिला। इसके साथ चित्रकला प्रतियोगिता में भी दर्जन भर बच्चों ने अपने नन्हें-नन्हें हाथों से तूलिका के माध्यम से आकृतियों को रंग दिया। सभी बच्चों को संन्तवना पुरस्कार के साथ प्रस्तति पत्र प्रदान किया गया। इस दौरान अमित श्रीवास्तव द्वारा गंगा स्वच्छता पर नृत्य नाटिका के साथ एक भाव नृत्य की प्रस्तुति की। जिसे लोंगो ने खूब सराहा।


आशापुर लोहिया नगर स्थित सामुदायिक केन्द्र में आयोजित स्वामी विवेकानन्द जयन्ती समारोह में मुख्य अतिथि के पद से सम्बोधित करते हुए प्रो. अंचल श्रीवास्तव, भौतिक विज्ञान, बीएचयू, वाराणसी ने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद जी ने पूरे विश्व में अपनी तेजस्वी वाणी के जरिए भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाया। स्वामी विवेकानंद ने केवल वैज्ञानिक सोच तथा तर्क पर बल ही नहीं दिया, बल्कि धर्म को लोगों की सेवा और सामाजिक परिवर्तन से जोड़ दिया। आज हम अपने बच्चों के दिनचर्या में खान-पान पर तो पूरा ध्यान देते हैं लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं देते है कि उसे योग आदि को भी उसके दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाये। आज जरूरत है कि हम अपने बच्चों को बचपन से ही पढाई के साथ अच्छे संस्कार के लिए प्रेरित कर रहे हेैं। उसे एक अच्छा इंसान बनाने के लिए तैयारी करें। तभी सच्चें अर्थो में विवेकानंद जैसे महाविभूतियों को हमारी श्रद्धाजंलि होगी।


विशिष्ट अतिथि के पद से सम्बोधित करते हुए डाॅ निष्ठा अधौलिया, एमडी एनेस्थेसिया, ईएसआई हास्पिटल वाराणसी ने कहा कि आज हमें अपने बच्चों के अन्दर अच्छे संस्कारों को देने की बहुत जरूरत है। इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों के अन्दर जहां उनके अन्दर लोंगो को समझने व प्रतिस्पद्धा की समझ आती हैं वहीं वह अपने महापुरूषों के विचारों को आत्मसात करते हैं जो उनके जीवन में बहुत काम आते हैं।
विशिष्ट अतिथि के पद से जिला टेन्ट एसोशिएशन के अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आज छोटे-छोटे बच्चों को इस तरह के कार्यक्रम में भाग लेने से उनके अन्दर जिज्ञासा का संचार होता है साथ ही साथ एक दूसरे को समझने और प्रतिस्पद्धा की भावना का जन्म होता है जो उन्हें आगे ले जाती हैं।
इससे पूर्व स्वागत करते हुए विजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से उर्जा का संचार होता है। जो आज के समय में बहुत ही जरूरी है। स्वामी विवेकानन्द के विचारों को हमें और अच्छी तरह से समझने व आत्मसात करने की जरूरत हेैं।


इस दौरान श्री चि़त्रगुप्त काशी सभा के महामंत्री अरविन्द श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में स्वामी विवेकानन्द जी की जयन्ती समारोह उस इतिहास के पन्नें को संकेत करती है जो अधिकतर लोंगो को पता ही नहीं है। शिकागों में स्वामी विवेकानन्द जी के अद्वितीय ओजस्वी भाषण के प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समय भारत के बारें में कटु बातें की जा रही थी उस दौरान भगवान बुद्ध के एक शिष्य बौद्ध भिक्षु ने स्वामी विवेकानन्द जी को स्पीच के लिए प्रोत्साहित किया जिसका परिणाम रहा कि स्वामी विवेकानन्द जी का वह ओजस्वी भाषणा एक मील का पत्थर साबित हुआ। जिसने भारत को विश्व गुरू के रूप में स्थापित करने की दिशा में पहल की।


अध्यक्षता करते हुए कायस्थ समिति सारनाथ के अध्यक्ष मोहन लाल श्रीवास्तव ने स्वामी विवेकानन्द जी के कई प्रसंगों के बारें में विस्तार से चर्चा करते हुए उनके विचारो को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।
संचालन राहुल सिन्हा व धन्यवाद ज्ञापन हरिशंकर सिन्हा ने किया। इस अवसर पर रविशंकर श्रीवास्तव, चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, अनुराग श्रीवास्तव, अमित आनन्द, संजीव श्रीवास्तव सहित दर्जनों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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