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अपने मेेहनत व लगन से गरीब किसान की बेटी ओमिका मौर्या जर्मनी रवाना

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विजय श्रीवास्तव
-चिरईगाॅव ब्लाक के उकथी गांव की है ओमिका
-विगत सात वर्षो से ट्यूशन पढ़ा कर अपने दो भाई-बहनों को पढ़ा रही है
-पिता किसी तरह से फूल बेच कर घर का उठा रहे हैं खर्च
वाराणसी। प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती। अगर आदमी के अन्दर प्रतिभा है तो रास्ते खुद-बखुद बनते चले जाते हैं और देर ही सही वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेता है। कड़ी मेहनत, लगन, धैय यह वह धरोहर है जो इंसान को सफल बना देती है। कुछ ऐसा ही वाराणसी के एक गांव उकथी के एक गरीब किसान की बेटी ने कर दिखाया। जिससे न सिर्फ आज परिवार का नाम रोशन हो रहा हैं वरन् पूरे गांव को आज ओमिका पर गर्व का अनुभव कर रहा है। आज ओमिका अपने प्रतिभा, कड़ी मेहनत, लगन के बल वह आज जर्मनी के लिए रवाना हो गयी जहां वह देश के ग्रामीण संदर्भ एवं सामाजिक मुद्दों, लिंग-भेद, बाल विवाह जैसे विषयों पर जर्मनी में अपनी प्रस्तुति देगी।
गौरतलब है कि समाजसेवी संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा डैक्सर-टीडीएच,जर्मनी के सहयोग से चलाये जा रहे महिलाओं  व युवाओं द्वारा सतत विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत ओमिका मौर्या यूथ ग्रुप की सक्रिय सदस्य है और विगत 2 वर्षो से पर्यावरण व विकास के कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती रही हैं लेकिन यह सब उसके लिए आसान नहीं था। सामान्य किसान परिवार में जन्मी 20 वर्षीय ओमिका, अपने 2 बहनों व एक भाई में सबसे बड़ी होने के नाते घर का कामधाम की जिम्मेदारी का भी निर्वहन करना पड़ता था। इन सबके बावजूद वह आज सुधा देवी महिला महाविद्यालय, पचराॅव, जाल्हूपुर में बीए का फाइनल इयर में पढ़ रही है। गरीबी के कारण यह सब इतना आसान नहीं था। पिता की दिन भर की मेहनत परिवार की सिर्फ पेट ही किसी तरह से भर पाती थी। आखिर ऐसे समय में 7 वर्ष पहले जब ओमिका जब कक्षा 9 में पढ़ रही थी, तभी उसने से गांव के छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और आज भी ट्यूशन पढ़ा कर परिवार खर्च में सहयोग कर रही है। दूसरी ओर पिता अपनी जमीन पर फूल की खेती करते हैं और पूरा परिवार मिलकर उन्हीं फूलों से माला तैयार करता है और फिर बनारस की मड़ी में पिता साईकिल से बेचने चले जाते हैं। फूल गूथने के काम में भी ओमिका मदद करती है। जिससे आज छोटे भाई-बहन भी पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही संस्था में भी बढ़चढ़ कर भाग लेती रहती है।
विगत तीन माह पूर्व 8 मार्च को डैक्सर-टीडीएच के सहयोग से जर्मनी से 5 युवा वारा.ासी सहित उ0प्र0 के विभिन्न जनपदों में यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आए थे और उसी कड़ी मंे देश के विभिन्न हिस्सों से 6 भारतीयों का चयन किया गया जो जर्मनी में 12 दिनों के यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम मंे जा रहे हैं। इन 6 युवाओं में ओमिका का भी सेलेक्शन हुआ है। वह भारत के  ग्रामीण संदर्भ एवं सामाजिक मुद्दों, लिंग-भेद, बाल विवाह जैसे विषयों पर अपनी प्रस्तुति देगी और जर्मनी के विभिन्न शहरों में अलग-अलग संस्थाओं तथा यूथ ग्रूप के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी करेगी। ओनिमा से जब इस सिलसिले में 24टाइम्सटूडे के संवाददता ने बात की तो वह भावुक हो गयी। ओठ कप-कपा उठे। लगा जैसे वह अपने अतीत में चली गयी है। जहां इस तरह की कल्पना ही की जा सकती है। ओनिमा ने कहा कि यह हमारें तथा परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बात है। मेरे जैसे गरीब परिवार की बेटी जो वाराणसी से भी बाहर निकलना भी मुश्किल था आज उसे जर्मनी जाने का सोैभाग्य मिल रहा है। यह किसी गौरव व स्वपन से कम नहीं है। यह हमारें लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। निश्चय ही जर्मनी में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। यह सब शायद अपने माता-पिता व संस्था के सहयोग से ही संभव हो सका है।

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