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अब काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह 11 बजे तक कर सकेंगे स्पर्श दर्शन, काशी विद्वत परिषद ने लिया निर्णय

विजय श्रीवास्तव
-पुरुष धोती कुर्ता और महिलाएं साड़ी में कर सकेंगे स्पर्श दर्शन
-विश्वनाथ धाम में बनेगा एक वैदिक केंद्र: डॉ नीलकंठ तिवारी’
-काशी विद्वत परिषद की बैठक में आज लिए गये कई निर्णय

वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अब दर्शनार्थी सुबह 11 बजे तक स्पर्श दर्शन कर सकेंगे। उक्त निर्णय रविवार मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद के सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी की अध्यक्षता में कमिश्नरी सभागार में आहूत बैठक में लिया गया। इस दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूजन दर्शन की व्यवस्था सहित कई अन्य विषयों पर भी विचार विमर्श के साथ अन्य निर्णय भी लिए गये। इस दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि स्पर्श दर्शन केवल पुरुष को धोती कुर्ता व महिलाओं को साड़ी पहन कर ही दर्शन की छूट होगी। जबकि अन्य लोगों को केवल दर्शन की छुट होगी।
मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद के सदस्यों के साथ बैठक में मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी ने सभी विद्वत जनों के सामने दो अहम प्रश्न रखे। उन्होंने कहा कि मंदिर में स्पर्श दर्शन का समय कैसे और बढाया जाए, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा को स्पर्श दर्शन कर सकें। साथ ही विश्वनाथ धाम में खरीदे गए भवनों से निकले विग्रह को कैसे संयोजित किया जा सके। इस मुद्दे पर बैठक में आए सभी विद्वत जनों ने एक मत से कहा कि बाबा का स्पर्श दर्शन मध्यान्ह आरती से पहले 11 बजे तक किया जा सकता है। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा का स्पर्श दर्शन कर सकेंगे, लेकिन किसी भी विग्रह को स्पर्श करने के लिए एक प्रकार का वस्त्र तय होना आवश्यक है। ऐसे में पुरुष को धोती कुर्ता व महिलाओं को साड़ी पहनने का एक नियम बनना चाहिए। इसके अलावा पैंट शर्ट, जींस, सूट, टाई कोर्ट वाले पहनावा पर केवल दर्शन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। सभी विद्वानों ने उज्जैन स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग, दक्षिण भारत स्थित सभी मंदिरों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि महाकाल में भी भस्म आरती के समय स्पर्श करने वाले बिना सिले हुए ही वस्त्र धारण करते हैं। बाकी सभी लोग केवल दर्शन पूजन करते हैं इसलिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए। इसके साथ ही विद्वत परिषद ने मंदिर में पूजा पाठ करने वाले सभी अर्चकों का भी एक ड्रेस कोड निर्धारित करने के लिए मंदिर प्रशासन को सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अर्चक का ड्रेस कोड ऐसा हो कि कहीं भी भीड़ में उसने आसानी से पहचाना जा सके। इस पर मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी ने भी कहा कि इस इस व्यवस्था को जल्द ही मंदिर में लागू कराया जाए 11 बजे तक स्पर्श दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को ड्रेस कोड के अनुसार ही स्पर्श कराया जाए।
इस दौरान श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए खरीदे गए भवनों के ध्वस्ती करण के बाद निकले मंदिरों और विग्रह को संयोजित करने को लेकर विद्वत परिषद के साथ चर्चा हुई, जिसमें मंदिर प्रशासन ने विद्त परिषद को बताया गया कि भवनों को तोड़ने के बाद 43 से अधिक मंदिर निकले हैं। इसके अलावा कुछ विग्रह भी मिले हैं। जिनको शास्त्र सम्मत विधि से एक स्थान पर संयोजित कर उसका पूजन किया जा सके। इन मंदिरों की जानकारी के बाद विद्वत परिषद के सदस्यों ने कहा कि आज सारा भ्रम दूर हो गया। यह तो बहुत ही हर्ष की बात है अब तक हम लोगों को मंदिरों को तोड़ने और विग्रह के हटाने की सूचना मिल रही थी, लेकिन मंदिर प्रशासन द्वारा ऐसा नहीं किया गया है जो कि सराहनीय है और इतने प्राचीन मंदिरों के मिलने के बाद हम लोगों की इच्छा है कि हम लोग श्री काशी विश्वनाथ धाम में मिले मंदिरों का निरीक्षण करें। इसके बाद इनमें से कितने ऐसे विग्रह हैं जिनको शास्त्रीय विधि से संयोजित किया जा सके इसकी रूप रेखा तय करेंगे। विद्वानों ने कहा कि किसी भी स्थान का बहुत ही बड़ा महत्व होता है इसलिए सभी विग्रह को शास्त्रोक्त और पौराणिक विधि से संयोजित कर सही किया जाएगा। इस दौरान विद्वत परिषद ने मंदिर प्रशासन से मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साक्षी विनायक ढूढ़ीराज गणेश वाले मार्ग से दर्शन पूजन कराने और काशी खंड के वे सभी मंदिर जो काशी में हैं उन सभी के जीर्णोद्धार कराने की मांग की गई। इस पर मंत्री डॉ0नीलकंठ तिवारी ने कहा कि धर्मार्थ कार्य विभाग एक पावन पथ बनवाया है। इस पावन पथ में उन सभी मंदिरों को लिया गया है, जो काशी खंडों के है।
इस दौरान विद्त परिषद के सदस्यों ने बन रहे श्री काशी विश्वनाथ धाम में शास्त्र और शास्त्रार्थ केंद्र खोलने की मांग की। इस पर धर्मार्थ कार्य मंत्री ने कहा कि विश्वनाथ धाम के मॉडल में पहले से ही एक वैदिक केंद्र बनाने की तैयारी है। इसमें पौरोहित प्रशिक्षण केंद्र भी खोला जाएगा, जिसमें इस केंद्र में सभी शास्त्री को कर्मकांड करने की शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा और अंग्रेजी की शिक्षा का तीन-तीन माह का कोर्स कराया जाएगा। साथ ही शास्त्र पुराण की सभी पुस्तकें उपलब्ध रहेगी। शास्त्रार्थ के लिए एक केंद्र भी बनाया जा रहा है। इस पर विद्त परिषद ने धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा बनवाए गए कॉरिडोर के मॉडल की सराहना भी की।
बैठक में वशिष्ठ तिवारी पूर्व अध्यक्ष दर्शन विभाग संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रोफेसर राम चंद्र पांडे उपाध्यक्ष काशी विद्वत परिषद, डॉ सुखदेव त्रिपाठी संगठन मंत्री काशी विद्त परिषद, प्रोफेसर राम किशोर त्रिपाठी उपाध्यक्ष काशी विद्त परिषद, डॉक्टर दिनेश कुमार गर्ग प्रवक्ता श्री काशी विद्त परिषद, डॉ राम नारायण द्विवेदी मंत्री श्री काशी विद्वत परिषद, कमिश्नर दीपक अग्रवाल, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह, डिप्टी कलेक्टर विनोद सिंह, अपर मुख्य कार्यपालक निखिलेश मिश्रा, तहसीलदार विनय राय उपस्थित रहे।

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