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अब देश में नागरिकों का होगा डेटाबेस तैयार, NPR की प्रक्रिया को मिली मोदी कैबिनेट की मंजूरी

न्यूज एडिटर
-खर्च होंगे 8500 करोड़ रूपये
-तीन चरणों में शुरू होगी प्रक्रिया
-देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस होगा तैयार
-डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी शामिल

नई दिल्ली। अभी राष्ट्रीय नागरिकता कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध थमा भी नहीं कि इसी बीच आज मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के अपडेशन को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही कैबिनेट ने इस प्रक्रिया के लिए 8,700 करोड़ रुपये के बजट आवंटन को भी मंजूरी दे दी। एनपीआर के तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। एनपीआर डेटाबेस नागरिकता के लिए नागरिकों को किसी तरह का प्रमाण नहीं होगा।
गौरतलब है कि एकपीआर देश के सभी सामान्य निवासियों का एक दस्तावेज है और नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे एनपीआर में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है। 2010 से सरकार ने देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने के लिए इसकी शुरुआत की। इसे 2016 में सरकार ने जारी किया था। अब इसके तहत नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में हर व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होंगी। ये सूचनाएं लोगों द्वारा खुद दी गई जानकारी पर आधारित होंगी। इसमें बाहरी व्यक्ति भी जानकारी दर्ज होगी। यह भारत के सभी सामान्य नागरिकों के लिए एनपीआर में नाम दर्ज कराना अनिवार्य है। पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन प्रक्रियाएं होगी। पहले चरण यानी अगले साल एक अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। वहीं दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा। तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च 2021 के बीच होगी। एनपीआर के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है। जबकि एनआरसी के जरिए देश में अवैध नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है।
साल 2021 की जनगणना से पहले 2020 में एनपीआर अपडेट किया जाना है। एनपीआर अपडेशन की प्रक्रिया 01 अप्रैल 2020 से शुरू होने वाली है। असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान 2020 में अप्रैल से सितंबर तक चलेगा। इस बाबत सरकारी अधिसूचना अगस्त में जारी की गई थी।

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