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अब मोदी के संसदीय क्षेत्र में मेट्रो की जगह चलेगी लाइट मेट्रो, देश की होगी पहली लाइट मेट्रो

Light-rail

विजय श्रीवास्तव
– वाराणसी में चलेगी देश की पहली लाइट मेट्रो
-वाराणसी की भौतिक स्थिति मेट्रो लायक नहीं
-राइट्स की टीम ने दिया प्रजेंटेशन
-लाइट मेट्रो में हो सकती है तीन से चार बोगी
वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब मेट्रो के स्थान पर लाइट मेट्रो चलेगी। यह देश की पहली लाइट मेट्रो होगी। इसके लिए कवायद भी शुरू हो गयी। सडको के किनारें पीलर पर बनने वाले ट्रेक पर चलने वाले लाइट मेट्रो के लिए आज प्रशानिक स्तर पर विचार विर्मश भी हुआ। इस दौरान रेलवे मंत्रालय की तकनीकी संस्था राइट्स की टीम ने वीडीए के साथ ही कमिश्नर के समक्ष अपना प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उम्मीद जतायी जा रही है कि जिला प्रशासन भी इसके फेवर में दिख रहा है।

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गौरतलब है कि वाराणसी में मेट्रों चलाने के लिए सपा से लेकर भाजपा ने जोरदार कवायद की लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर सका। इसके लिए सबसे अधिक जिम्मेदार वाराणसी की भोैगोलिक स्थिति है। शहर की सडकों के नीचे सीवर व नहरों का जाल मेट्रो के मार्ग में सबसे बडा रोडा है। जिसको देखते हुए राइटस ने इसके लिए लाइट मेट्रों का कान्सेप्ट लेकर दो दिनों से बीडीए व कमिश्नर आदि के समक्ष प्रजनेंटशन कर रहे है। राइटस ने वाराणसी के भौतिक स्थिति को देखते हुए लाइट मेट्रों चलाने का सुझाव दिया है।

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मालूम हो कि राइट्स ने ही पहले मेट्रो रेल परियोजना के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की थी। जिसके तहत बीएचयू से भेल तक और बेनियाबाग से सारनाथ तक दो रूट निर्धारित किए थे। जिसके तहत 28 किमी पर 20 हजार करोड रूपये खर्च होने थे जबकि लाइट मेट्रो जो कि मेट्रो रेल का ही छोटा रूप है। मेट्रो में छह से आठ बोगियां होती हैं, वहीं लाइट मेट्रो में मात्र तीन बोगियां होती हैं। एक बार में यह ट्रेन करीब डेढ़ सौ यात्रियों को लाने ले जाने में सक्षम होगी। इसके संचालन के लिए शहर में पिलर बनाकर उस पर ट्रैक बिछाया जा सकता है। इसके संचालन के लिए मेट्रो से कम जगह की आवश्यकता पड़ती है। इस दौरान वीडीए वीसी राजेश कुमार, नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल, लखनऊ मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी मौजूद थे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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