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अब होगी शिक्षकों के मान, सम्मान व उनके अधिकारों की रक्षा: रमेश सिंह

विजय श्रीवास्तव/पंकज तिवारी
-शिक्षक विधान परिषद सदस्य चुनाव की सरगर्मी तेज
-वित्तशिक्षकों की हालत आज गुलामी जैसी

जौनपुर। यूपी में शिक्षक विधान परिषद सदस्यों के चुनाव का बिगुल बज चुका है। यह और बात है कि अभी चुनाव तिथि का एलान नहीं हुआ है। अप्रैल माह में होने वाले इस चुनाव को कोरोना के चलते टाल दिया गया था लेकिन राज्यसभा के चुनाव के तिथि का एलान होने से अब यह लगने लगा है कि चुनाव आयोग शिक्षक विधान परिषद का चुनाव भी शीघ्र करा सकती है। जिसको देखते हुए चुनाव में ताल ठोकने वाले प्रत्याशियों की सरगर्मी बढ गयी है।


इस बार के शिक्षक विधान परिषद सदस्य के चुनाव में वाराणसी क्षेत्र से शिक्षकों के मान, सम्मान, स्वाभिमान और अधिकार के लिए संकल्पित प्रादेशिक माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष व जौनपुर के तेज तर्रार रमेश सिंह भी इस बार चुनाव मैदान में हैं। 24टाइम्सटूडे से विशेष बातचीत में रमेश सिंह ने कहा कि अभी तक शिक्षकों का दोहन होता रहा है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उन्हें उनका सम्मान व अधिकार मिलेगा। अभी तक रिटायर्ड शिक्षकों के इस पद पर काबिज होने से उनकी स्थिति बदतर होती जा रही है। वित्तशिक्षकों की हालत तो आज गुलामी जैसी होगी, जब संचालक की इच्छा हुई तब रखा और जब इच्छा हुई तो उसे स्कूल से बाहर निकाल दिया। कोरोना महामारी के इस दौर में तो उनकी स्थिति और बदतर हो चुकी है। अधिकतर स्कूल संचालकों ने तो शिक्षकों को आधा-तिहाई वेतन देकर टरका दिया है जिससे उनके घरों में खाने के लाले पड़ने की स्थिति आ चुकी है। ऐसे संकट के समय में सरकार ने भी चुप्पी साध रखी है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उनको उनका हक व सम्मान दिलानें के लिए आर-पार की लड़ाई होगी। चुनाव जीतने के बाद मेरा काम इन शिक्षकों के लिए नियमावली सहित उनके अधिकार को दिलाना होगा।


जौनपुर जिले के अलावा इस निर्वाचन क्षेत्र के आठों जनपदों में तूफानी दौरा कर रहे रमेश सिंह ने कहा कि शिक्षकांे में नया जोश और उत्साह दिखाई पड़ रहा है। वह भी बदलाव चाहते हैं। उन्होंने मन बना लिया है कि अब रिटायर्ड शिक्षकों को उनका सही रास्ता दिखाना जरूरी है। उनके दर्द को वहीं जान सकता है जो उनके करीब व उनके बीच का हो। उन्होंने कहा कि उनको मिल रहे भरपूर समर्थन से सेल्फ डिफेंस गेम खेलने वाले शिक्षक नेताओ में हड़कंप मच गया है। श्री सिंह ने दावा किया कि यदि शिक्षक बंधुओ का भरपूर आशीर्वाद मिला तो सबसे पहले पुरानी पेंशन बहाली के लिए पूरी ताकत झोक देगें। इसके लिए मैं हर कुर्बानी देने के लिए तैयार रहूंगा।


गौरतलब है कि रमेश सिंह ने सन् 1987 में ग्रामोदय इण्टर कालेज गौराबादशाहपुर में शिक्षक के रूप कार्यभार ग्रहण किया। शिक्षण कार्य करने के साथ ही वे शासन प्रशासन द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न के लिए आवाज उठाना शुरू किया। उनके इस तेवर को देखते हुए माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई ने उन्हे अपने कालेज का शाखा महामंत्री पद का जिम्मेदारी सौप दिया। नयी जिम्मेदारी मिलते ही रमेश सिंह का जोश दोगुना हो गया। आन्दोलनो में बढ़ चढ़कर भाग लेने के कारण उन्हे 1995 में जिले के संगठन में संयुक्त मंत्री पद सौपा गया। 1998 में उनका ओहदा बढ़ाते हुए जिला उपाध्यक्ष बना दिया गया। करीब पांच वर्ष तक वे उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सम्भाला। उनके कार्यो को देखते हुए प्रदेश संगठन ने उन्हें सन् 2003 में जिला अध्यक्ष बना दिया। सन् 2007 तक वे जिले की कमान सम्भालते हुए शिक्षकों के हितो की लड़ाई लड़ते हुए सफलता हासिल किया। रमेश सिंह की निष्ठा को देखते हुए उन्हे सन् 2008 में प्रदेश मंत्री का दायित्व सौपा गया। उसके बाद सन् 2014 से अब तक वे प्रदेश उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सम्भाल रहे है।

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