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अयोध्या : अस्थाई मंदिर में विशेष पूजा के साथ विराजमान हुए श्रीरामलला

अयोध्या व्यूरो
-अभिषेक कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने विशेष आरती की
-रामलला को 492 साल बाद बुधवार तड़के 3 बजे अस्थाई मन्दिर में किया गया शिफ्ट
-अस्थाई मंदिर में स्थापना के बाद श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए

अयोध्या। भगवान श्रीरामलला को आज बुधवार नवरात्रि के पहले दिन अस्थायी फाइबर मंदिर में विधिवत पूजा-पाठ के साथ स्थापित कर दिया गया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इस दौरान श्री रामलला के साथ उनके भाइयों और भक्त हनुमान को भी आज बुधवार तड़के करीब 3 बजे नए अस्थाई मंदिर में स्थापित किया गया। रामलला का चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया जिसका वजन 9.5 किलोग्राम है। इसी के साथ अस्थाई मंदिर में स्थापना के बाद श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
इस दौरान श्रीरामलला व उनके भाइयों व हनुमानजी समेत अलग-अलग पालकियों में बिठाकर ले जाया गया। प्रस्थान से लेकर प्रतिस्थापित होने के दौरान स्वस्ति वाचन हुआ। इस दौरान पहले उनका श्रृंगार हुआ। उसके बाद अभिषेक और आरती हुई। यह कार्यक्रम सुबह 7 बजे तक चला। इसके बाद श्रीरामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने भी विशेष आरती की। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए दान में 11 लाख रुपए का चेक भी दिया। इससे पहले मंगलवार को मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भगवान से नए स्थान पर विराजने की प्रार्थना की और सालों से चली आ रही रस्म को पूरा करते हुए नए अस्थाई मंदिर का वास्तु पूजन किया। रात 2 से तड़के 3 बजे तक टेंट में स्थित गर्भगृह में श्रीरामलला की अंतिम बार आरती, भोग और श्रृंगार किया गया। इससे पहले अयोध्या में रामलला को वैकल्पिक नए मंदिर में शिफ्ट करने के लिए होने वाले अनुष्ठान को कराने के लिए प्रसिद्ध वैदिक आचार्य डॉक्टर कृति कांत शर्मा ने अनुष्ठान और भूमि के शुद्धिकरण का काम सोमवार से शुरू कर दिया। वर्ष 1528 के बाद पहली बार श्रीरामलला चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए। मालूूम हो कि नया अस्थाई मंदिर कुटी की तरह तैयार किया गया है, जिसे जर्मन पाइन लकड़ी व कांच से बनाया गया है।चांदी का यह सिंहासन जयपुर के कारीगरों ने बनाया है। चांदी के सिहासन के पृष्ठ पर सूर्य देव की आकृति और दो मोर उत्कीर्ण किए गए हैं। रामलला इसी आकर्षक सिहासन पर विराजमान हुए। मौजूदा समय में मूल गर्भगृह के अस्थायी मंडप में रामलला लकड़ी के सिहासन पर विराजित हैं। राजा विमलेंद्र मोहन मिश्र यह सिंहासन लेकर अयोध्या आए. उन्होंने यह सिंहासन ट्रस्ट को समर्पित कर दिया। इसका प्लेटफार्म संगमरमर से तैयार किया गया है। पूरे पूजा कार्यक्रम अनुष्ठान के दौरान रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास, ट्रस्ट के सदस्य राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, सदस्य अनिल मिश्रा, ट्रस्ट के महासचिव चपंत राय, दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास, अवनीश अवस्थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे।
अयोध्या में बुधवार को रामलला को चांदी के सिंहासन पर विराजमान होने के बाद अब मूल गर्भगृह पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। गी। इस बीच, ट्रस्ट के सदस्य विमलेंद्र मोहन मिश्र ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि-पूजन की तिथि तय करने के लिए 4 अप्रैल को अयोध्या में प्रस्तावित बैठक के आयोजन पर संशय है। भूमि पूजन के लिए ट्रस्ट के पास कई शुभ मूहूर्त की तिथियां हैं, जिनमें एक तिथि 30 अप्रैल भी है। लेकिन, कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकना हमारा पहला कर्तव्य है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि राम मंदिर भूमि पूजन भी स्थगित हो सकता है। पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा है कि विक्रम संवत 2077 की शुरूआत व चैत्र नवरात्रि के प्रतिपदा से श्रीरामलला के विराजमान होने से देश में सुख-समृद्धि और शांति आएगा।

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