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आभासीय संग्रहालय से वाराणसी की संस्कृति को और बेहतर ढंग से समझने में होगी आसानी: प्रह्लाद सिंह

विजय श्रीवास्तव
-आभासीय संग्रहालय से विदेशी सैलानियों को मिलेगा लाभ
-संग्रहालय के सभागार का किया उद्घाटन

वाराणसी। भारत के संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), संस्कृति मंत्रालय प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग संरक्षित स्मारक मान महल में नवीनतम स्थापित आभासीय अनुभूति संगहालय वाराणसी की जीवंत संस्कृति को और बेहतर ढंग से समझने में मील का पत्थर साबित होगा। मोक्षदायनी गंगा के तट दशाश्वमेध घाट पर स्थित इस संग्रहालय से निश्चय ही विदेशी सैलानियों को भी विश्व की सबसे प्राचीनम संस्कृतिक नगरी काशाी को और गहराई से समझने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है आभासीय अनुभूति संग्रहालय की स्थापना संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत कार्यरत राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद द्धारा की गयी है। परिषद ने वाराणसी के विभिन्न सांस्कृति पक्षों-मूर्त और अमूर्त को आधुनिक और परिष्कृत वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से दिखाने का कठिन परिश्रम किया है। इस आभासीय संग्रहालय का विभिन्न विधिकाओं में स्थापित त्रि-आयामी दृश्य, जैसे वाराणसी के पवित्र घाटों, शास्त्रीय संगीत, साडियों की बुनाई, प्रसिद्ध कथाकारों व लेखकों, राम लीला, संकरी गलियों और ताम्बूल भण्डारों, गंगा के पृथ्वी पर उद्भव एंव उवतरण की कहानी आदि की जानकारी प्राप्त कर संस्कृति मंत्री ने विभाग द्धारा किए जा रहे कार्यो को सराहा और उसकी प्रंशसा की।
श्री पटेल अपने दो दिवसीय दौरे के तहत कल जहां मान महल में स्थित आभासीय अनुभूति संग्रहालय का भ्रमण किया वहीं आज भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में स्थित संग्रहालय के सभागार का सोनी इलेक्ट्रनिक्स द्धारा सीएसआर फण्ड द्धारा किए गये जीर्णोद्धार कर बनाए गये भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान संग्रहालय में अन्य पुरातात्विक वस्तुओं के साथ भारत के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तम्भ सहित मूलगंध कुटी विहार, चौखण्डी स्तूप आदि भी अवलोकन किया। इस दौरान पुरातात्विक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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