आशापुर रेलवे फाटक को लेकर प्रतिनिधि मंडल डीएम व डीआरएम से मिला, क्षेत्रिय लोंगो का विरोध जारी

विजय श्रीवास्तव
-रेलवे का्रंसिग बन्द होने से व्यापारियों को भारी क्षति
-लोहिया नगर कालोनी निवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए करना होगा जद्ोजहद
-आशापुर चौराहा जाने के लिए 100 मीटर की दूरी के लिए 1 किलोमीटर की लगानी होगी परिक्रमा

वाराणसी। आज कोई भी विकास कार्य होता है तो उससे क्षेत्रिय लोगों को लाभ मिलता है लेकिन भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ के समीप आशापुर में स्थित रेलवे क्रासिंग पर बने नवनिर्मित रेलवे ब्रिज ने आशापुर सहित आसपास के तीन चार गांव के लांगो का विकास थम सा गया है। इस रेलवे ब्रिज के बनने के बाद अब रेलवे इस आशापुर रेलवे क्रासिंग को बन्द करने जा रहा है। जिससे जहां आसपास के रहने वालों को दूसरे तरफ जाने के लिए एक किलोमीटर का लम्बा चक्कर लगाना होगा। इसके साथ ही सैकडों व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह से ठप होने के कगार पर है। जिसको लेकर लोहिया नगर कालोनी से एक प्रतिनिधि मंडल डीएम, डीआरएम से मिल कर उन्हें ज्ञापन देकर रेलवे क्रासिंग को बन्द न करने का आग्रह किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में पीएम नरेन्द्र मोदी को भी एक पत्रक दिया गया।


गौरतलब है कि आशापुर रेलवे क्रासिंग पर बना पुल शुरू से चर्चा में रहा। लगभग तीन वर्षो में बने इस पुल में भष्टाचार व खामियों का जखीरा है। पुल बनते ही ऊपर सडक बैठ गयी। क्षेत्रिय विधायक व मंत्री रविन्द्र जायसवाल भी आये और अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाकर अपना कोरम पूरा कर चले गये। पुल के दोंनो तरफ सर्विस रोड की बात की जाये तो वह खामियों का भण्डार है। इस पुल से निश्चिय ही आशापुर रेलवे फाटक पर लगने वालें जाम से लोंगो को निजात मिलेगी लेकिन इसके एवज में लोंगो को अपना व्यापार, सुख-चैन सब कुछ न्योछावर करना होगा। यह क्षेत्रिय लोंगो नहीं सोचा था।
रेलवे के आला अधिकारियों द्धारा नियम कानून का हवाला देते हुए इसे बन्द करने का फरमान सुना दिया है। अधिकारियों को कहना है कि जहां भी क्रांसंग पर पुल बनते है उसे बन्द कर दिया जाता है लेकिन वहीं हैरत की बात यह है कि मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के समीप बने लहरतारा पुल के नीचे के क्रासिंग को आज तक बन्द नहीं किया गया। जिसका कारण समीप रेलवे के आला अधिकारी रहते हैं जिसके चलते वहां रेलवे का यह कानून नहीं चलता है। जबकि आशापुर रेलवे क्रासिंग से हवेलिया तक रेलवे के किनारें दोंनो ओर रेलवे कर्मचारियों द्वारा बनाया गयी रेलवे सहकारी समिति है जिसमें 116 रेलवे के लोंग आज भी रहते हैं। हैरत की बात यह है कि रेलवे ने ही यह जमीन भी बेची है। लेकिन आज इस कं्रासिग के बंद होने से पूरब तरफ के लोंगो को आशापुर जाने के लिए एक किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। सबसे अधिक छोटे बच्चों के लिए स्कूली बस आना संभव नहीं हो पायेगा। समय असमय अगर लोंगो को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी हो जाये तो एम्बुलेंस पहुंचने में भी काफी मशक्कत करनी पडेगी।

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सबसे हैरत की बात यह है कि इस क्रासिंग के बन्द होने से आशापुर चौराह, आशापुर बाजार, तिलमापुर, लेढुपुर, हिरामनपुर के छोटे व्यापारी जो कि पिछले दो साल से कॅरोना का दंश झेल रहे थे, कोरोना काल की वजह से व्यापार चौपट हो गया माथे पर कर्ज का बोझ अलग से हो गया। दुकानों के किराया, बिजली, घर खर्च से ही तबाह हो चुके व्यापारियों को दोहरा झटका सेतु निगम एवम रेलवे प्रशासन द्वारा ओवर ब्रिज बनाने से पूरा साल सर्विस रोड के अत्यधिक खराब होने की वजह से भी धंधा चौपट हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर फाटक बंद कर दिया तो सचमुच सैकड़ो परिवार भुखमरी के कागार पे आ जाएंगे।
इसी सन्दर्भ में लोहिया नगर कालोनी से एक प्रतिनिधि मंडल मंडल रेलवे अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें रेलवे फाटक बंद न करने के सन्दर्भ में ज्ञापन दिया। जिस पर डीआरएम ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिल कर उन्हें भी ज्ञापन देकर इस समस्या से निजात दिलाने का मांग की। तपश्चात प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम लिखे एक पत्रक को प्रधानमंत्री कार्यालय में सौंप कर फाटक को बंद न करने की मांग की। प्रतिनिधि मंडल में भाजपा के पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ दया शंकर मिश्रा दयालू व लोहिया नगर कालोनी के राजीव सिंह, अनील सिंह, आनन्द प्रकाश श्रीवास्तव आदि लोग शामिल रहें।

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