उत्तर प्रदेश में बूचड़खाने पर एक्शन शुरू, 15 पर लटके ताले

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-वाराणसी में भी बूचड़खाने पर लगे ताले
-भारी विरोध के बाद भी पुलिस ने किया सीज
वाराणसी।  विश्व की अध्यात्मिक  नगरी व सांस्कृतिक राजधानी के रूप में श मार होने वाली काशी नगरी में आने वाले दिनों में बूचड़खाने बन्द हो जायेंगे। इसके लिए जिला प्रशासन ने पहल शुरू कर दिया है। लखनऊ से मिले निर्देश के बाद वाराणसी पुलिस भी पूरे एक्शन में आ चुकी है। जहां तक पूरे प्रदेश की बात की जाये तो अभी तक लगभग 15 बूचड़खानों को सरकार ने सीज कर उनपर ताले लगा दिए है।
वाराणसी में आज अलईपुरा में संचालित हो रहे अवैध स्लाटर हाउस को प्रशासन ने सील कर मुहिम की शुरूआत कर दी। आज मंगलवार को सुबह जब कोतवाली क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में भारी मात्रा में पुलिस फोर्स स्लाटर हॉउस पर जब पहुंची तो अफरातफरी मच गया। स्लाटर हाउस के मालिक के वैध कागजात न दिखा पाने के कारण पुलिस ने सीज करने की तैयारी शुरू कर दी। जिसका जोरदार ढंग से विरोध भी हुआ। तीन घंटे तक चले जद्दोजहद के बाद आखिरकार पुलिस ने बूचड़खाने को सीज कर उसपर ताला लटका दिया। इस दौरान पुलिस व स्थानीयल लोंगो में नोंकझोंक भी हुई। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव के दौरान भाजपा ने उत्तर प्रदेश में शपथ ग्रहण की रात को ही सभी बूचड़खाने को बन्द करने की बात की थी। जिसकों लेकर प्रदेश सरकार ने एक्शन लेना शुरू भी कर दिया है। जहां तक वाराणसी में स्थित बूचड़खाने की बात की जाए तो बेनियाबाग, कमलगड़हा (गोलगड्डा), कचहरी (अर्दली बाजार) में पशु वधशालाएं हैं। इसके अलावा, भेलूपुर और हुकुलगंज में अवैध बूचड़खाने संचालित होते हैं। जो कहीं रिकॉर्ड में ही नहीं हैं। सब कुछ नगर निगम और पुलिस की मिलीभगत से चलता है। वहीं, बेनियाबाग, कमलगड़ा और कचहरी के स्लाटर हाउस पर शासन स्तर से रोक लगी हुई है।

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