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कर्नाटक : आखिरकार येदियुरप्पा सरकार गिरी, बहुमत से पहले ही दिया इस्तीफा, कुमार स्वामी अब बनेंगे मुख्यमंत्री

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-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी  पीएम मोदी पर हुए हमलावर
-आंकड़े नहीं जुटा सकी बीजेपी
,-केवल ढाई दिन रही येदियुरप्पा सरकार
बंगलोर। आखिरकार बीएस येदियुरप्पा ने विधानसभा में बहुमत साबित करने के पहले ही मैदान छोड दिया और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अचानक बदले हालात में पहले विधानसभा में येदियुप्पा ने सदन में अपना स्पीच देना शुरू किया तब तक सबको उम्मीद थी कि वे बहुमत साबित करने के मैदान में डटे रहंेगे लेकिन जैसे-जैसे उनका स्पीच समाप्त होने लगा लोंगो को लगने लगा कि वे अब सेलेण्डर के मुड में आ रहे हेैं और हुआ भी यही। उन्होंने अचानक इस्तीफा की घोषणा करते हुए राज्यपाल के पहुंच कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। विगत ढाई दिन चले रोमांचक ड्रामा का अन्त जहां भाजपा के दिख दुखद रहा वहीं कांग्रेस के लिए संजीवनी के लिए काम किया। इस पूरे प्रकरण में जेडीएस को जहां सबसे अधिक खुशी मिली, उसके पार्टी को सीएम की कुर्सी नसीब हुई लेकिन वहीं दूसरी तरफ जश्न सबसे अधिक कांग्रेस ने मनाया। भाजपा की इस करारी हार के लिए जहां कांग्रेस पूरी तरह से हमलावर हुई हैं वहीं अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी भाजपा पर हमला बोल दिया है। जानकारी के मुताबिक सोमवार को जेडीएस के कुमार स्वामी शपथ ले सकते हेैं।

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गौरतलब है कि पिछले 5 दिनों से चल रही लंबी कवायद और जोर-आजमाइश के बाद कर्नाटक में बीजेपी सरकार ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और संख्याबल जुटाने से पहले इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि येदियुरप्पा ने अपने लंबे भाषण में आगे की कई रणनीति का जिक्र किया और फिर अंत में राज्यपाल के पास जाकर इस्तीफा सौंपने का ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने 4 बजे भाजपा को सदन में अपना बहुमत साबित करने को कहा था साथ ही पूरे सदन की कार्यवाही को लाइव टेलीकास्ट करने को कहा था। अन्तिम समय तक जहां भाजपा अपने 104 विधायको की संख्या को बढाने में लगी थी वहीं कांग्रेस व जेडीएस अपने विधायको को एक जुट करने के लिए परेशान थी। इस बीच कांगे्रस व जेडीएस ने भाजपा पर अपने विधायकों के खरीदने व अपहरण तक का आरोप तक लगाया। मालूम हो कि जेडीएस को जहां 38 वहीं कांग्रेस को 78 सीट मिले थे वहीं भाजपा को 104 सीटों पर विजय श्री मिली थी। जबकि बहुमत के लिए 112 विधायकों की जरूरत थी। इस चुनाव ने कांग्रेस को संजीवनी दे दी है कि जिससे वह 2019 के चुनाव में संघर्ष की स्थिति में आ सकेंगे। इस चुनाव के निश्चय ही दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। अगर 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अगर विजय श्री मिलती है तो निश्चय ही उसकी पटकथा की शुरूआत कर्नाटक का चुनाव होगा।

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