काशी के घाटों पर दिखा स्वर्ग का नजारा

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-लाखों दीपों से घाट हुआ गुलजार
-देशी-विदेशी पर्यटकों ने अदभुत नजारा को अपने कैमरों में कैंद
वाराणसी.। विश्व की प्राचीनतम नगरी में शुमार काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा के घाटों पर अगर यह कहा जाये कि स्वर्ग उतर आया तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी। घाट की सीढ़ियों पर टिमटिमाते दिये जैसे स्वर्ग के उस अनुपम छटा का बयान कर रही थीं जो हम कल्पना में अपने स्मृति में सजोते हैं। शाम होते ही जेैसे पूरी काशी नगरी घाटों पर उमड़ पड़ी। हर आदमी जैसे घाट के हर पल की मनोरम छटा को अपने मानस पटल, कैमरों में कैद करने के लिए आतुर दिखा। ऐसी मान्यता है कि देवदीपावली पर देवगण का आगमन होता है।

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काशी में देव दीपावली अब आज पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाती जा रही है। घाट के इस अनुपम दृश्य को अपने कैमरें में कैंद करने के लिए हजारों की संख्या में अब विदेशी भी आने लगे है। शाम होते ही पूरा गंगातट जब लाखों दीपों से जगमगा उठा। दीपों के प्रतिबिम्ब गंगा के पानी में चादॅ से जिस तरह से अठखेलियाॅ करते दिख रहे थे, वह हर किसी को अपने ओर आकर्षित कर रहा था।

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काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर जहां गंगा में लाखों लोग सुबह डुबकी लगाते है वहीं शाम होते जेैसे उसका पुण्य उन्हें मिलता दिखने लगता है। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच कल-कल करती गंगा की लहरों के बीच घाटो पर बजते घंट-घड़ियाल बरबस ही लोंगों को स्वर्ग का सैर करा रहे थंे। शिव की नगरी काशी में देव दीपावली की चकाचैंध से मानो पूनम की रात भी फीकी नजर आ रही थी।

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देशी विदेशी पर्यटक छोटी-बड़ी नौका लेकर देवदिपावली के इस नजारें को अपने कैमरे में कैंद करते नजर आये। इस क़ड़ी में मीडिया ने भी इस पर्व को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। देवदीपावली पर घाटों पर मजहब की सारी दीवारें ध्वस्त हो जाती है। हर जाति व मजहब के लोंग इस अनुपम छटा को अपने चक्षु से दीदार करने से नहीं रोक पाते हैं। मॉरिशस के प्रधानमन्त्री अनिरुद्ध जगन्नाथ खुद देव दीपावली देखने पहुंचे थे। केन्द्र और राज्य सरकार के मन्त्री व अधिकारी के साथ वीआईपी की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।

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