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किसान आंदोलन : सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी से अलग हुए भूपिंदर सिंह मान

विजय श्रीवास्तव
-किसान आंदोलन पर चार सदस्यीय कमेटी में बनाये गये थे सदस्य
-मान ने कहा कि वह किसान हितों से काई समझौता नहीं कर सकते
-सुप्रीम कोर्ट को कमेटी को दो माह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है
-किसान संगठनों ने इस कमेटी को पहले ही ठुकरा दिया था

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए गठित कमेटी के एक सदस्य भूपेंद्र सिंह मान ने कमेटी छोड़ने का एलान किया है। इससे केन्द्र सरकार को कृषि आन्दोलन को लेकर किए जा रहे प्रयास को झटका लगा है। आज एक वक्तव्य जारी करते हुए कृषि सुधार कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के प्रधान भूपेंद्र सिंह मान ने कमेटी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया कि उन्हें कमेटी में शामिल किया गया, जिसने किसानों और केंद्र सरकार के बीच तीन कृषि कानूनों को लेकर बातचीत करके रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी थी। वैसे कमेटी के गठन के दिन से ही सिंघुु, टीकरी बार्डर पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने इस कमेटी को ठुकरा दिया था।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पूर्व कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म करने के तहत जहां तीनों नए कृषि कानूनों केे अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी वहीं सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन और आल इंडिया किसान को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, कृषि अर्थशास्त्री और साउथ एशिया इंटरनेशनल फूड पालिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डाक्टर प्रमोद जोशी, कृषि अर्थशास्त्री और एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइज कमीशन के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी तथा शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट शामिल हैं, लेकिन अब कमेटी से भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को दो माह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है, लेकिन मान के कमेटी से अलग होने के बाद अब रिपोर्ट कैसे तैयार होगी इसके लिए असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
आज जारी वक्तव्य में भारतीय किसान यूनियन के प्रधान भूपेंद्र सिंह मान ने कहा कि वह केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति में उन्हें नामित करने के लिए आभार व्यक्त करते हैं, लेकिन वह किसान हितों से कतई समझौता नहीं कर सकते। वह इस कमेटी से हट रहे हैं और हमेशा पंजाब व किसानों के साथ खड़े हैं। मान राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। किसान संघर्षों के लिए उनके योगदान को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कमेटी में शामिल किया था।

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