केंद्रीय श्रमिक संघ आज से दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, इस्पात, बिजली, बैंकिंग, बीमा और परिवहन क्षेत्र हो सकते है प्रभावित

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अर्थ डेस्क
-20 करोड़ कर्मचारी आज रहेंगे
-श्रम सुधार और श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में कई छात्र संगठन भी बंद में शामिल
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के एक तरफा श्रम सुधार और श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में आज से लगभग 20 केंद्रीय श्रमिक संघ दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। इसमें बैंक कर्मचारी यूनियन, श्रमिक संगठनों के साथ ही असम में नागरिकता संशोधन बिल 2016 के विरोध में असम के कई छात्र संगठनों ने शामिल होने की घोषणा की है। इससे निश्चय ही बैंक सहित अन्य संस्थाओं के काम में आम जनता को परेशानी का सामना करना पड सकता है। वैसे यह अनुमान लगाया जा रहा हैं कि भारतीय स्टेट बैंक में संभवतः कामकाज होने की उम्मीद है।

एटक की महासचिव अमरजीत कौर ने कल यानि सोमवार को 10 केंद्रीय श्रमिक संघों की एक सयुंक्त प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि दो दिन की हड़ताल के लिए 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने हाथ मिलाया है। जिसमें 20 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने की आसार है। संघों ने जारी संयुक्त बयान में इसकी जानकारी दी कि करीब 20 करोड़ कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत सरकार की जनविरोधी और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ इस हड़ताल में सबसे ज्यादा संख्या में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी शामिल होंगे। दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, इस्पात, बिजली, बैंकिंग, बीमा और परिवहन क्षेत्र के लोगों के इस हड़ताल में शामिल होने की उम्मीद है। कौर ने कहा, हम बुधवार को नई दिल्ली में मंडी हाउस से संसद भवन तक विरोध जुलूस निकालेंगे। गौरतलब है कि श्रमिक संघों ने ट्रेड यूनियन अधिनियम-1926 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध किया है। वहीं दूसरी ओर असम में नागरिकता संशोधन बिल 2016 के विरोध में नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) ने 11 घंटे के बंद का आह्वान किया है जिसका मिजो जिरलाइ पवाल (एमजेडपी), ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (एएपीएसयू), नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ), असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने उन्हें अपना समर्थन दिया है।

 

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