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क्वेटो का प्रोजेक्ट अगर सारनाथ के साथ जोडा गया होता तो आज वाराणसी की तस्वीर कुछ और होती : सुमेध थेरो

sumedh photo

विजय श्रीवास्तव
-क्वेटो शहर जापान की पौराणिक बौद्धिष्ट राजधानी है
-बुद्धिष्ट देश होने के कारण जापान में भगवान बुद्ध के प्रति विशेष श्रद्धा है
-जापानियों में सारनाथ के प्रति विशेष लगाव व उसे तीर्थस्थली के रूप में मानते हैं
वाराणसी। क्वेटो का प्रोजेक्ट अगर सरकार सारनाथ के नाम पर लाने का प्रयास करती तो अभी तक तस्वीर कुछ और होती। क्वेटो शहर जापान की पौराणिक राजधानी है। क्वेटो की पहचान एक बुद्धिष्ट शहर के रूप में है। जापान एक बुद्धिष्ट देश है। उनकी भगवान बुद्ध के प्रति अपार श्रद्धा है। जिसके चलते वह भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को बौद्ध धर्म की तीर्थस्थली के रूप में देखते हैं।  क्वेटो को सारनाथ के साथ जोडने से जापान के लोग सीधे अपने आपको भगवान बुद्ध से जुडा हुआ महसूस करते और दिल खोलकर सारनाथ के नाम पर समर्पित भाव से काम करते, जिससे जहां सारनाथ तथा आसपास का विकास होता ही वहीं वाराणसी का भी विकास देखने को मिलता।
उक्त बात सारनाथ में डाॅ के सिरी सुमेध थेरो,जम्बूदीप श्रीलंका बुद्धिष्ट टेम्पल के बिहाराधिपति ने 24timestoday.com न्यूज वेब पोर्टल के न्यूज एडिटर विजय श्रीवास्तव से खास बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आज जापान में बौद्ध धर्म के चलते भारत का विशेष आदर व सम्मान है। वे भगवान बुद्ध में विशेष श्रद्धा रखते हैं। आज भले ही टोकियो वर्तमान में जापान की राजधानी हैं लेकिन नारा व क्वेटो जापान की पौराणिक राजधानी है। यहां हजारों की संख्या में बौद्ध मन्दिर है। केवल क्वेटो में ही साढे पांच हजार बौद्ध मन्दिर हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है, कि क्वेटो को जापान के लोग कितनी श्रद्धा के साथ देखते हैं। जब सारनाथ का सीधे क्वेटो के साथ जोडने की बात की जाती तो निश्चय ही जापान के लोग खुलकर सारनाथ के लिए आगे आते और सारनाथ का विकास होता। सारनाथ को हाईलाइट करने से हर जापानी क्वेटो में अपने भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ की छवि को देखता और बढ चढ कर जापानी सारनाथ को सजांने-सवारने व इसके विकास के लिए दिल खोल कर आगे आते क्योकि उन्हें सीधे यह लगता कि वे भगवान बुद्ध के लिए कुछ कर रहे हैं। इससे सारनाथ आसपास का विकास होता ही वहीं दूसरी ओर धीरे-धीरे वाराणसी का भी विकास होता।
डाॅ भिक्षु थेरो ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी जापान जाते है तो उन्हें भगवान बुद्ध के देश भारत से आने के कारण भी जापान उनका विशेष सम्मान करता है और उन्हें बुद्ध मन्दिर में ले जाते हैं लेकिन वहीं जब जापान के प्रधानमंत्री वाराणसी आते हैं तो अभी तक एक बार भी उन्हें सारनाथ स्थित भगवान बुद्ध के मन्दिर में नहीं लाया गया। जापान के पीएम को सारनाथ में स्थित बुद्ध मन्दिर में लाने से हम कहीं न कहीं जापान को और अध्यात्मिक रूप से जोडने में सफल होते क्योंकि निश्चय ही भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में आने के कारण  उन्हें हम वाराणसी से और बेहतर तरीके से जोड सकते थे। इससे जहां सारनाथ का विकास होता ही वहीं धीरे-धीरे वाराणसी का भी विकास होता।

 

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