Breaking News

गोरखपुर बीआरडी कालेज में फिर तीन दिन में 65 बच्चों की मौत, सरकार से लेकर डाक्टर बेफिक्र

kaf
विजय श्रीवास्तव
-28 अगस्त को 29, 29 अगस्त को 21 मौतें
-प्रिंसिपल ने कहा सामान्य मौत
-नहीं थम रहा है मासूमों के मौत का सिलसिला
-पूर्व प्रिंसिपल सहित पत्नी गिरफ्तार
गोरखपुर/वाराणसी। गोरखपुर का बीआरडी कालेज मासूमों के हत्या का कब्रगाह बन चुका है। तीन साल में लगभग तीन हजार बच्चों के मौत का गवाह बना यह अस्पताल अब मौत की कोठरी के रूप में तब्दील हो चुकी है। आक्सीजन कमी के  कारण विगत दिनों हुई दर्जनों मौत के बाद भी न प्रदेश सरकार ने कोई ऐतिहातन कदम उठा पायी और नहीं वहां कार्यरत डाक्टरों के सेहत पर कोई असर पडा। तभी तो कालेज के पिं्रसिपल का कहना है कि यह सामान्य मौत हैं।
 गोरखपुर के आसपास जिलों की कभी मासूमों की संजीवनी का काम करने वाला बीआरडी कालेज अब मासूमों को मौत का सर्टिफिकेट बाट रहा है। विगत दिनों आक्सीजन के कमी के बाद मचे हाहाकार के बाद फिर मौत का सिलसिला उसी तरह से चल पडा है। आखिर सरकारी अस्पताल में ही मासूमों की मौत अधिक क्यों होती है। इससे किसी को सरोकार नहीं हैं। गरीबी की मार झेल रहे लोग अपने बच्चों को यहां जीवन देनेका अरमान लेकर आते तो जरूर हैं लेकिन उन्हें अधिकतर मौत की नसीब होती है और यह सिर्फ प्रदेश सरकार व अस्पताल प्रशासन की ढुलमुल रवैया व लापरवाही का नतीजा है। इतना बडा कांड होने के बाद भी न तो सीएम, न तो स्वास्थ्य मिनिस्टर और नहीं कालेज प्रशसन ने जिम्मेदारी लेने की जहमत उठायी उनके नजर में तो यह सामान्य मोैत और अगस्त में इस तरह के मौत का जुमला जो जेहन में घुम रहा है। विपक्ष की आवाज भी आज दब कर रह गयी है। मामला चूकि गरीबों के बच्चों का है इसलिए यह कोई मामला बनता भी नहीं है अगर इसी में किसी मिनिस्टर, विधायक व वीआईपी का लडका मरता तो शायद अभी तक नजारा कुछ और होता। सरकार हजारों मौत के बदले कुछ डाक्टरों को गिरफ्तार करेगी और को सस्पेंड। फिर सब कुछ उसी तरह से चलता रहेगा। हाॅ इन मारे गये मासूमों के घर अलबत्ता अनवरत रह-रह कर चीखें व सिसकियाॅ शायद कभी नहीं रूकेगीं।

Share

Related posts

Share