चाईना से टक्कर लेंगे-डिजीटल उद्यमिता से लैस बनारस के शिल्पी एवं बुनकर, एमजीनी की पहल

RAJ
विजय श्रीवास्तव
–एक क्लिक में बनारस के शिल्प व वस्त्र  विश्व बाजार पटल पर
वाराणसी। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी अब स्वदेशी आंदोलन को एक नया आयाम देने के लिए एक और पहल प्रारम्भ कर दिया है। इतना ही नहीं बनारस के महीन कारीगरी शिल्प व वस्त्र बाजार को एक क्लिक में पूरे विश्व बाजार में उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा दिया है। यह इसलिए भी और प्रशंसनीय हो जाता है कि यह काम स्वंय बनारस के युवा शिल्पी व बुनकर स्वंय करेंगे। इसके लिए दिल्ली की एमजीनी संस्था ने पहल की है।  
एमजीनी संस्था और युवा शिल्पी व बुनकरों की मेहनत अगर रंग लायी तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के सबसे बड़े जीआई हब काशी के शिल्प व वस्त्र आने वाले समय मंे विश्वबाजार में एक क्लिक करते ही छा जाएंगे। जिससे उपभोक्ताओं को सही गुणवत्तावाले असली सामान, सही स्थान से सीधे मास्टर शिल्पियों एव ं मास्टर बुनकरों से उचित मूल्य पर प्राप्त होंगे, विचैलियों का वर्चस्व टूटेगा और विभिन्न कारणों से समस्याओं से जूझ रहे बनारस के बौद्धिक सम्पदा उत्पादों को पुनः दुनिया का बाजार मिल जाएगा। नई पीढी इस प्रक्रिया से ओैर मजबूत होगी ओैर फैशन डिजाईन के साथ-साथ आधुनिक माॅगों के अनुरूप बुनकर एवं शिल्पी अपने घरा ें से ही अपने उत्पादों को दिखा सकेंगे और देश की तरक्की में अपनी भूमिका निभाएंगे। शायद यही डिजिटल प्रशिक्षण चाईना जैसे देश से लड ़ने का सबसे बड़ा हथियार साबित होगा। एमजीनी, नोएडा, के सहयोग से हयूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो
दिवसीय ‘‘डिजीटल उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  विजय शंकर सिंह, सहायक आयुक्त-हस्तशिल्प, भारत सरकार ने उक्त विचार व्यक्त किया।
इस दौरान एमजीनी के प्रबन्धक निदेशक श शर्बेन्दु बनर्जी ने कहाकि पूरी दुनिया के बाजार तेजी से डिजिटाईजेशन की तरफ बढ़ रहे हैं, और देश में मोबाईल फोन का नेटवर्क लगभग 80 प्रतिशत से भी अधिक लोगों तक पहुॅच चुका है, वाराणसी जो हस्तशिल्प एवं हथकरघा का दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र है, में अब यह आवश्यकता है कि विचैलियों को द ूर करके सीधे शिल्पियों एवं बुनकरों को डिजिटल उद्यमिता का प्रशिक्षण प्रदान कर बिना किसी खर्च के विश्वबाजार से जोड़ा जाए, इसी कारण इस अभियान की शुरूआत वाराणसी से की जा रही है तथा आने वाले एक वर्ष में लगभग 500 युवा मास्टरशिल्पियो ं एवं बुनकरों को प्रशिक्षित कर, निःशुल्क  मोबाइल पर ही वेबसाईट तैयार करके एवं प्रमोट करके इनके उत्पादों का प्रचार-प्रसार इन्हीं के द्वारा किया  जाएगा, जिससे उपभोक्ता सीधे इनसे जुड़ा रहेगा। जिला प्रबन्धक-नाबार्ड सुशील तिवारी ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में नाबार्ड के द्वारा शिल्पियों को पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। उपनिदेशक एमएसएमई, भारत सरकार श्री वी.के. वर्मा ने कहा कि एमएसएमई से जुड़े लाखों उत्पादनकर्ता सीधे लाभान्वित होंगे एवं सरकार की विभिन्न योजनाओं से इन्हें जोड़ा जाएगा।
कार्यशाला में तकनीकी जानकारी एमजीनी के कार्यक्रम अधिकारी श्री सुधांशु जैन ने कुंजविहारी सिंह, जमालुद्दीन अंसारी, राजकुमारसिंह, राजकुन्देर, आदर्शकुमार, उदयप्रताप, नुसरतजहाॅ, जीनत केसरी, इशरतअली, अमरनाथ, कैसरजहाॅ,अवधेश,दिनेश र्मार्या सहित सभी प्रतिभागियांे को प्रशिक्षण प्रदान किया।कार्यक्रम का संचालन संस्था प्रमुख डाॅ0 रजनीकान्त ने किया।

Share

Leave a Reply

Share