जीडीपी में लगातार गिरावट से केन्द्र सरकार परेशान. आज करेंगे मोदी-जेटली व वित्त अधिकारी मंथन

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-जीडीपी की वृद्धि दर लगातार छठी तिमाही में घटी है
– औद्योगिक वृद्धि दर भी 5 साल में सबसे नीचे
-बैठक में आर्थिक विकास दर को पटरी पर लाने को लेकर होगी चर्चा
नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केन्द्र सरकार के प्रयास के औधें मुहं गिरने से सरकार अब परेशान है। नोट बंदी व जीएसटी के चलते अब जीडीपी में गिरावट ने मोदी सरकार की चिन्ता और बढा दी है। 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए जीडीपी के रेट ने सरकार की नींद उडा दी है। अधिकारिक सूत्रों की माने तो आज प्रधानमंत्री मोदी व वित्त मंत्री अरूण जेटली के साथ आर्थिक मुद्दो के जानकारों व अधिकारियों के साथ आज मंथन कर सकते हैं।
अगर सूत्रों की माना जाये तो सरकार अब अर्थव्यवस्था में नरमी ला सकती है। इसके लिए यह बैठक महत्वपूर्ण हो सकती है। इस बैठक में पीएम मोदी आर्थिक स्थिति से संबद्ध विभिन्न पहलुओं के बारे में जेटली और वित्त मंत्रालय के सचिवों के साथ चर्चा करेंगे और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपाय तलाशेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में जारी पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि आंकड़े आने के बाद यह बैठक हो रही है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि 5.7 प्रतिशत रही जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है। इससे पूर्व वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 7.9 प्रतिशत तथा पिछली तिमाही जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही थी। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातर छठी तिमाही में घटी है। इतना ही नहीं निर्यात के समक्ष भी चुनौतियां हैं और औद्योगिक वृद्धि दर पांच साल में न्यूनतम स्तर पर आ गई है। अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर जीडीपी का 2.4 प्रतिशत या 14.3 अरब डॉलर पहुंच गया. मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढ़ने से कैड बढ़ा है।

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