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डा. ज्ञानादित्य शाक्य ‘श्रमण पुरुस्कार 2017’ से सम्मानित

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-गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पालि के प्रवक्ता
-कई ग्रन्थों की रचनाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है
लखनऊ। पालि सोसायटी आफ इण्डिया, वाराणसी के संस्थापक सदस्य व गौातम बुद्ध विश्वविद्यालय में पालि के प्रवक्ता डा. ज्ञानादित्य शाक्य को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महामहिम राम नाईक जी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी के कर कमलों द्वारा ‘श्रमण पुरुस्कार 2017’ प्रदान किया गया। यह पुरुस्कार पालि साहित्य के विकास में योगदान हेतु इनकी कृति ‘‘नामरूपसमास यनाम-रूप का सारांश‘‘ पर प्रदान किया गया। यह ‘सम्मान समारोह 2016-2017’ उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा लखनऊ के लोक भवन में आयोजित किया गया।
प्रसिद्ध बौद्धतीर्थ-स्थल संकिसा के पास स्थित जिला मैनपुरी के मानिकपुर ग्राम में जन्मे डा. ज्ञानादित्य शाक्य ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पैतृक जिले से ग्रहण करते हुए डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से स्नातक करके राष्ट्रसन्त तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के पालि व प्राकृत विभाग में प्रथम श्रेणी व स्वर्णपदक के साथ स्नातकोत्तर किया। तदुपरान्त आपने ‘पालि भाषा व साहित्य, ‘बौद्ध, जैन, गाँधी एवं शान्ति अध्ययन एवं ‘धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन नामक विषयों में कनिष्ठ शोध-वृत्ति के साथ राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद आपने विश्वविख्यात बौद्ध विद्वान् प्रोफेसर भिक्षु सत्यपाल महास्थविर के निर्देशन में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.फिल. व पी-एच.डी. की उपाधियाँ ग्रहण की। अब तक आप कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग ले चुके हैं। इसके साथ अब तक आपके कई शोध-पत्र व लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं, तथा आप विभिन्न शोध पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक-मण्डल में भी हैं। आपकी ‘बौद्ध धर्म-दर्शन में ब्रह्मविहार-भावना, ‘जिनालंकार, ‘दाठावंस यशाक्यमुनि गौतम बुद्ध की दन्त-धतु का इतिहास, ‘अनागतवंस यमेत्तेय बुद्ध का इतिहास, ‘छकेसधतुवंस यशाक्यमुनि गौतम बुद्ध की छह केश-धतुओं का इतिहास, ‘पचगतिदीपनी यपाँच गतियों का प्रदीपन’, ‘नामरूपसमास यनाम-रूप का सारांश, नामक दस अद्वितीय शोधपूर्ण कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान समय में आप गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के बौद्ध अध्ययन व सभ्यता संकाय में सन् 2011 से सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
डा0 शाक्य के इस सराहनीय कार्य पर पालि सोसायटी आफ इण्डिया, वाराणसी के पदाधिकारियों सहित संस्थापक सदस्यों ने खुशी व्यक्त किये है। जिनमें अध्यक्ष- भिक्षु डा0 स्वरूपानन्द महाथेरो, उपाध्यक्ष- भिक्षु डा0 रमेश चन्द्र नेगी, महासचिव- प्रो0 रमेश प्रसाद, सचिव- भिक्षु नन्दरतन थेरो, कोषाध्यक्ष- भिक्षु धर्मप्रिय थेरो, सदस्य क्रमशः भिक्षु महेन्द्र थेरो, भिक्षु ज्ञानालोक थेरो, बुद्ध घोष, संजय कुमार, अजय कुमार मौर्य आदि लोग प्रमुख रूप से है।

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