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दक्षिण काशी के युवक ने काशी में रचायी बौद्ध रीति रिवाज से शादी

 

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विजय श्रीवास्तव 
-प्रतीक व सोनम दोंनो पूना में इंजीनियर हैं
-भगवान बुद्ध के उपदेशों से प्रेरित होकर लिया फैसला
वाराणसी। आस्था व तपस्या की तपोभूमि सारनाथ में न जाने कितने लोग भगवान बुद्ध के उपदेशों से प्रभावित होकर यहां की भूमि को नमन करने आते हैं। बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी  उनके समय में रही। इसका  जीता जागता नमूना आज सारनाथ में देखने को मिला। जब महाराष्ट्र के दक्षिण काशी निवासी प्रतीक ने विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी व बुद्ध की उपदेश स्थली से अपने दाम्पत्य जीवन की शुरूआत की। आज प्रतीक ने सोनल के साथ सारनाथ में स्थित धम्रचर्क बौद्ध विहार में बौद्ध  रीति रिवाज से एक सूत्र में बधें।
प्रतीक गायकवाड़ व उनका  परिवार बोैद्ध धर्म के अनुयायी है। प्रतीक व उनकी पत्नी सोनल दोंनो इस समय पूना में इंजीनियर हैं। प्रतीक का शुरू से ही भगवान बुद्ध में आस्था रहा है। उन्होंने अपनी शादी बुद्ध की उपदेश स्थली व बौद्ध रीति से करने की बात अपने अपने पिता अशोक गायकवाड़ व अपनी माता से कही । अपने पुत्र के विचार को सुनकर अशोक गायकवाड़ ने निर्णय लिया कि वे ऐसा ही करेंगे।

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इस सन्दर्भ में अशोक गायकवाड़ जो डाॅ अम्बेडकर रिपब्लिकन पार्टी आॅफ इण्डिया के अध्यक्ष के साथ भारत रक्षक अघाड़ी महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि जब उनके बेटे प्रतीक ने यह प्रस्ताव सामने रखा तो वे  आश्चर्यचकित रह गये,  यहां कोई परिचित न होने के कारण थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन धर्मचक्र बौद्ध विहार के सचिव संजय कुमार से एक व्यक्ति के माध्यम से भेंट हुई तो उन्होंने अपने बौद्ध मन्दिर में बौद्ध रीति रिवाज से विवाह करने की अनुमति प्रदान कर दी। जिसपर हम लोग आज सपरिवार आज बौद्ध रीति रिवाज से शादी करा रहे है। यह शादी बौद्ध रीति रिवाज से धर्मचक्र बौद्ध विहार के अध्यक्ष व महाबोधि इन्टर कालेज के पालि के प्रवक्ता भन्ते धर्मप्रिय ने करायी।

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