देवरिया: अब यूपी के बालिका गृह में भी शारीरिक शोषण, 24 बच्चियों को प्रशासन ने कराया मुक्त, डीएम, डीपीआरओ सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई

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सिकन्दर कुशवाहा/विजय श्रीवास्तव
-बालिका गृह अवैध तरीके से चल रहा था: रीता बहुगुणा
-रविवार की रात भाग कर एक लडकी ने दिया पुलिस को बयान
-रजिस्टर में 42 लड़कियों के नाम दर्ज, मिलीं सिर्फ 24
देवरिया/गोरखपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में 34 लडकियों के शारीरिक शोषण से मचा सियासी तूफान अभी थमा भी नहीं था कि अब यूपी के देवरिया जिले में स्थित एक बालिका गृह पर भी लडकियों के शारीरिक शोषण का आरोप की बात सामने आने से तूफान खडा हो गया है। इस मामले का खुलासा रविवार को तब हुआ, जब यहां से एक लड़की किसी तरह भागकर पुलिस के पास पहुंच गयी। लड़की के बयान के बाद प्रशासन ने आनन फानन में बालिका गृह पर छापा मारा और वहां मौजूद 24 लड़कियों को मुक्त कराया। इस बीच उत्तर प्रदेश की महिला और बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के इस बयान ने और तूफान खडा कर दिया जिसमें उन्होंने कहा कि यह बालिका गृह अवैध तरीके से चल रहा था। अब प्र्रश्न उठता है कि आखिर यह बालिका गृह किसके इशारे पर चल रहा था। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित कार्रवाही करते हुए देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डीपीओ प्रभात कुमार को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बाल एवं महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार से मामले की रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने इसकी महिला संचालिका गिरजा त्रिपाठी, उसके पति और बेटे को गिरफ्तार कर लिया।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार देवरिया में चल रहे इस केंद्र का नाम मां विन्ध्वासिनी बालगृह संस्था है। जो विगत कुछ वर्षो से चल रहा है। बताया जाता है कि रविवार की रात को एक लडकी किसी तरह से बालिका गृह से भाग कर रोते हुए पुलिस के पास पहुच गयी ओैर उसने पुलिस बालिका गृह के बारें में सचाई बताई। पुलिस ने तत्काल इस बारें में प्रशासन को जानकारी दी। तत्काल पुलिस व प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बालिका गृह पर छापा मार कर 24 लडकियों को मुक्त कराया। पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय ने बताया कि संस्था के रजिस्टर में 42 लड़कियों के नाम हैं। इनमें से 24 लड़कियों को मुक्त कराया गया। बाकी लड़कियां कहां हैं, इस बारे में संचालिका से पूछताछ की जा रही है।

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पुलिस के मुताबिक, बालिका गृह से भागकर आई लड़की ने बताया कि बड़ी लड़कियों को बड़ी मैम रात को कहीं भेजती थीं। उन्हें लेने के लिए कभी लाल तो कभी काली गाड़ी आती थी। जब ये लड़कियां सुबह आती थीं तो सिर्फ रोती थीं। कुछ भी पूछने पर बताती नहीं थीं। बालिका गृह में लड़कियों से झाड़ू पोछा भी करवाया जाता था। सबसे ताज्जुब की बात यह है कि देवरिया के डीपीओ प्रभात कुमार का कहना है कि इस संस्था में अनियमितता पाई गई थी। उसके आधार पर इसकी मान्यता रद्द हो चुकी थी लेकिन इसके बाउजूद कैसे यह बालिका गृह चलता रहा। यह आश्चर्यजनक है। दूसरी ओर योगी सरकार की महिला और बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि पिछले साल सीबीआई निरीक्षण के दौरान ये तथ्य सामने आए थे कि देवरिया स्थित यह शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहा है। इसके बाद सरकार की ओर से यहां रहने वाली लड़कियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और इस बालिका गृह को बंद करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। इतने गंभीर मामले में जहां अनमितता सीबीआई निरिक्षण के दौरान पायी गयी हो उसके बाउजूद मंत्री महोदया ने केवल आदेश देकर अपना कोरम पूरा कर दिया। क्या इतने गंभीर मसले पर उन्हें या उनके आला अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि क्या उनके आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं।

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बहरहाल एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर कुछ दिनों तक जांच, कमेटी, विधानसभा-लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा, चैनलों पर जोरदार डिबेट का दौर चलेगा। जानकारी मिली है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यों की टीम गठित कर दी है। अपर मुख्य सचिव बाल कल्याण विभाग रेणुका कुमार और एडीजी अन्जू गुप्ता को जांच करने के लिए हेलीकॉप्टर से तत्काल देवरिया भेजा गया है। मण्डल कमिश्नर मौके पर पहुँच गए हैं। टीम आज हर जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

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