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देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 10 लाख के पार, 25 हजार से अधिक लोंगो की मौत

विजय श्रीवास्तव
-भारत में 67 दिन तक सम्पूर्ण लॉकडाउन रहा
-पिछले तीन दिन में एक लाख की हुई वृद्धि
-80 प्रतिशत से ज्यादा मामले 1 जून के बाद ही अनलाॅक में आए
-आज हम पूरे विश्व में तीसरे स्थान पर हैं

नई दिल्ली। सरकार के लाख दावंे के बाद भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है। लाॅकडाउन हटने के बाद जिस दिन से देश ने अनलॉक की तरफ कदम बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर कोरोना ने अपने कदम तेजी से बढ़ाया है। आज देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 10 लाख के पार पहुंच गया है। महज तीन दिन में ही हमारे देश में 1001,464 मरीज मिले। इससे पहले 8 से 9 लाख मरीज होने में भी तीन ही दिन लगे थे। देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा भी आज 25,587 हो गया है। इसके बाद भी आज हम इस बात से भले ही खुश हो कि अब तक 659834 लोगों ने कोरोना को मात भी दी है, तो शायद हम अभी भी गफलत में हैं। फिलहाल देश में कोरोना के 3,41,630 मामलें हैं।


इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि कोरोना को लेकर देश में जम कर राजनीति हो रही है। वह चाहे केन्द्र में बैठी भाजपा हो चाहे वह विपक्ष। हर जगह सरकार अपनी पीठ थपथपानें व गुणगान में ही व्यस्त है। 10 लाख का आंकड़ा पार करने के बाद भी अभी भी सरकार के सामने इससे निपटने के लिए कोई ब्लू प्रिन्ट नहीं है। सरकार इस वैश्विक महामारी के समय भी वर्चुअल रैली के माध्यम से अपनी उपलब्धि व कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर अपनी पूरी उर्जा झोंक रही है। काश यही टीम अगर कोरोना दूर भगाने में सरकार लगाती तो निश्चय ही आज शायद हम 10 लाख का आंकड़ा पार नहीं कर पाते। कोरोना को छोड कर आज सरकार के हर सांसद व मंत्री बोलने के लिए तैयार है। अगर हर सांसद व विधायक को अगर आज अपने क्षेत्र में रहकर कोरोना से निपटने व पीडित लोंगों की सहायता करने का आदेश सरकार दे ंतो निश्चय ही तस्वीर कुछ और देखने को मिले। जहां तक विपक्ष की बात की जाए तो यह देश में अब हर आदमी समझ झुका है कि सरकार व विपक्ष एक दूसरे की आलोचना के लिए ही बनंे हैं लेकिन सरकार को यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि हर प्रश्न का जवाब सरकार को ही देना पडेगा। चीन, नेपाल, पाकिस्तान प्रकरण भी आज कहीं न कहीं कोरोना की लडाई को कमजोर करने का प्रयास किया है।


शुरूआती दौर में हमसे कुछ गलतियाॅ हुई। हमारे देश में संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को आया था। उसके 55 दिन बाद टोटल लॉकडाउन लगाया गया। ऐसा कहा जा रहा था कि भारत, दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने संक्रमण के सबसे कम मामलों पर ही लॉकडाउन कर दिया। ये गलत है। पेरू में फिलहाल 3.37 लाख मामले हैं और यहां पहला मामला आने के 10 दिन बाद ही लॉकडाउन लगा दिया गया था। यहां जब लॉकडाउन लगा था, तब 71 मामले ही थे। जबकि, भारत में लॉकडाउन से एक दिन पहले तक 571 मरीज मिल चुके थे। देश में पहला मरीज मिलने के 55 दिन बाद 25 मार्च से टोटल लॉकडाउन लगाया गया। उसके बाद चार बार कुछ-कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन बढ़ता रहा। आखिरकार 67 दिन बाद देश से लॉकडाउन हटा और अनलॉक की प्रक्रिया शुरु हुई। उसके बाद तो कोरोना ने तेजी से पैर पसारना जो शुरू किया वहीं अभी तक जारी है। 16 जुलाई तक देश में 10 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले 1 जून के बाद ही आए हैं। इसी तरह अब तक 25,587 मौतें हुई हैं, जिनमें से 80 मौतें देश अनलॉक होने के बाद हुईं हैं। शायद हमने कोरोना को समझने में देर की और अभी भी हम इसे हल्के में ले रहे हैं।


दिल्ली को छोड कर अन्य प्रदेश की सरकार कोरोना की लडाई अपने ढंग से लड रही हैं। दिल्ली शायद इस लिए कि राजधानी के साथ आज हर सांसद व मंत्री का ठिकाना दिल्ली है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य प्रदेशों में कोरोना अपने पूरे रफ्तार मंे हैं। दिल्ली में निश्चय ही केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास के चलते ही कुछ रफ्तार कम हुई है। यही प्रयास अगर हर राज्य में हो तो निश्चय ही रफ्तार कम होगी। सरकार को अपना-पराया का ध्यान झोड कर उसे आगे आना होगा और आज केवल लाॅकडाउन हटाने व लगाने के लिए सर्वदलीय बैठक से इतर हट कर इस पर रणनीति ब्लूप्रिन्ट बनाने की जरूरत है। बयानबाजी से बाहर निकल कर सरकार को धरातल पर उतरने की जरूरत है तभी इस वैश्विक महामारी को निपटने में हम कामयाब होंगे।

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