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नलकूप चालक परीक्षा का पेपर आउट होने से परीक्षा निरस्त, कई सेन्टरों पर हंगामा

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विजय श्रीवास्तव
-3210 पदों के लिए वाराणसी सहित आठ जिलों में था परीक्षा
-यूपीएसएसएससी आयोजित कर रहा था इस परीक्षा आयोजन
-सपा शासनकाल में जारी हुआ था विज्ञापन
लखनऊ। प्रतियोगिता परीक्षा जैसे आज एक मजाक बन कर रह गयी हे। आये दिन पेपर लीक होने के कारण या तो परीक्षाएं निरस्त हो रही हैं या परीक्षा होने के बाद अनियमितता की शिकायत मिलने पर कोर्ट द्धारा परीक्षा परिणाम पर रोक या उसे निरस्त किए जाने का एक प्रचलन सा चल पडा है। जिसका परिणाम लाखों बेराजगारों को झेलना पड रहा है। इसी क्रम में शनिवार रात अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की नलकूप चालक परीक्षा-2018 का प्रश्नपत्र भी आउट हो गया। यह परीक्षा रविवार यानि आज होनी थी। पेपर आउट होने का सूचना मिलते ही आयोग में अफरातफरी मच गया। आनन फानन में आयोग ने परीक्षा को निरस्त करने का फैसला किया। जिससे दूर दराज से आए हजारों की संख्या में परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पडा। समय पर सूचना न मिलने पर कई सेन्टरों पर परीक्षार्थियों के पहुचने पर हंगामे की स्थिति रही। इस परीक्षा के लिए दो लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

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हैरत की बात यह है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) नलकूप चालक परीक्षा का सपा शासनकाल में विज्ञापन जारी हुआ था। नलकूप चालक परीक्षा 3210 पदों के लिए प्रदेश के आठ जिलों में आयोजित होनी थी। पहले इसमें स्क्रीनिंग परीक्षा के बाद साक्षात्कार के जरिये चयन होना था लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद इसकी प्रक्रिया रोक दी गई थी। बाद में आयोग ने सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर ही चयन का फैसला किया। इसके लिए शासन ने मंजूरी दे दी थी। इसके बाद ही परीक्षा की तिथियां घोषित की गईं। वैसे शनिवार को ही दिन में अभ्यर्थियों के बीच पेपर आउट होने की चर्चाएं थीं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं होने से दूसरे जिलों से काफी संख्या मंे परीक्षार्थी आठ जिलों में पहुंच चुके थे। सुबह सेन्टरों पर परीक्षार्थी पहुंचे तो उन्हें परीक्षा निरस्त की खबर मिली। वैसे अन्य परीक्षाओं के आयोग की भाति यूपीएसएसएससी आयोग के अध्यक्ष सीबी पालीवाल का कहना है कि इसकी जांच करायी जा रही है कि पेपर कैसे आउट हुआ। दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाये जाएंगे। आयोग का दावा है कि इससे पहले आयोग ने परीक्षा संपन्न कराने की पूरी तैयारी कर ली थी और लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, आगरा और बरेली में पर्यवेक्षक भी भेजे जा चुके थे। अभ्यर्थी भी इन जिलों में पहुंच गए थे। सुबह नौ बजे तक केंद्रों पर पहुंचने के लिए कहा गया था। परीक्षा निरस्त होने की सूचना मिलते सब परीक्षार्थी परेशान होकर हंगामा करने लगे।

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बेराजगारों के प्रति केन्द्र व प्रदेश सरकारें पूरी तरह से उदासीन हो चुकी है। जिसका असर प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजन कराने वाली संस्थाए बेलगाम हो चुकी है। भाजपा के शासन की ही बात की जाए तो पूरे चार वर्षो में दर्जनों की संख्या में पेपर आउट होने, अनियमितता आदि के कारण परीक्षाएं जहां निरस्त हो चुकी हैं वहीं कई परीक्षाओं में अनियमिता की शिकायत मिलने पर परीक्षा सम्पन्न होने के बाद भी कोर्ट के आदेश पर रिजल्ट को रोक दिया गया है। जिससे लाखों की संख्या में बेराजगारों के सामने भविष्य अंधकारमय हो चुका है। अभी हाल में कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं का पेपर लीक होने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल ही रहा है।

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