Breaking News

नवरात्रि का छठा दिन: माॅ कात्यायनी देवी की साधना से धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष रूपी पुरुषार्थ की होती है प्राप्ति

nav 6

पं. प्रसाद दीक्षित
धर्म, कर्मकांड एवं प्रख्यात ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञ
-माॅ कात्यानी देवी के आराधना से अलौकिक तेज तथा प्रभाव की प्राप्ति होती है
वाराणसी। नवरात्रि का छठवें दिन माॅ कात्यायनी की पूजा व दर्शन का विधान है। मां कात्यायनी दिव्यता की अति गुप्त रहस्य की प्रतीक हैं। व्यक्ति का भाग्य उसके आंतरिक अदृश्य जगत से संचालित होता है। वह जगत जो अदृश्य है, हमारी इंद्रियां भी उसका अनुभव नहीं कर सकती तथा जो हमारी कल्पना से परे है। वही जगत माता कात्यायनी के प्रताप से संबंधित है।

नवरात्रि के छठे दिन मां के कात्यायनी रूप का ध्यान पूजन करने से भक्तों की आंतरिक सूक्ष्म जगत में चल रही नकारात्मकता का नाश होता है तथा सकारात्मकता का विकास होता है। सुनहरे एवं चमकीले वर्ण वाली चार भुजा वाली एवं रत्न आभूषणों से अलंकृत कात्यायनी देवी खूंखार एवं झपट पढ़ने वाली मुद्रा में रहने वाले सिंह पर सवार रहती हैं। इनका आभामंडल विभिन्न देवताओं के तेज अंशो से मिश्रित इंद्रधनुषी देता है। प्राणियों में इनका वास ‘आज्ञा चक्र‘ में होता है तथा योग साधक इस दिन अपना ध्यान आज्ञा चक्र में ही लगाते हैं। माता कात्यायनी की एक भुजा अभय देने वाली मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा वर देने वाली मुद्रा में रहती है। बाई ओर की ऊपर वाली भुजा में वे चंद्रहास तलवार धारण करती हैं, जबकि नीचे वाली भुजा में कमल का फूल रहता है। एकाग्र चित्त एवं पूर्ण समर्पित भाव से माता कात्यायनी देवी की उपासना करने वाला भक्त बड़ी सहजता से धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति कर लेता है। सच्चे साधक को मां कात्यायनी दर्शन दे कृतार्थ करती हैं। वह इस लोक में रहकर भी अलौकिक तेज तथा प्रभाव को प्राप्त कर लेता है।

FRIDAM

माता कात्यायनी की सच्चे मन से पूजा करने वाले जातक के रोग, शोक, संताप, भय के साथ साथ जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इनकी निरंतर उपासना करने वाला जातक परम पद प्राप्त करता है। मां कात्यायनी की उपासना से तेज बढ़ता है तथा भक्तों की ख्याति भी दूर-दूर तक फैल जाती है। मां अपने भक्तों को निराश नहीं करती। माता कात्यायनी को आज के दिन छुआरा का भोग लगाएं तथा विभिन्न प्रकार का पुष्प अर्पित करें। सफेद मिष्ठान्न ना चढ़ाकर रंगीन मिष्ठान चढ़ाना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

Share

Related posts

Share