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नवरात्रि का सातवां दिन : मां कालरात्रि की उपासना से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है

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पं. प्रसाद दीक्षित
धर्म, कर्मकांड एवं प्रख्यात ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञ
-माॅ देवी को सफेद एवं लाल वस्त्र चढ़ाने सर्वोत्तम लाभ प्राप्त होता है
वाराणसी। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना व पूजा का विधान है। माॅ कालरात्रि की पूजा से से प्रतिकूल ग्रहों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली बाधाएं समाप्त होती है तथा जातक अग्नि, जल, जंतु, शत्रु आदि के भय से मुक्त हो जाता है। मां कालरात्रि का स्वरूप भयानक होने के बावजूद भी वह शुभ फल देने वाली देवी हैं। माता कालरात्रि नकारात्मक, तामसी एवं राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश कर भक्तों को दानव, दैत्य, भूत- प्रेत आदि से अभय प्रदान करती हैं। माता का यह स्वरूप भक्तों को ज्ञान एवं वैराग्य प्रदान करता है। घने अंधेरे की तरह एकदम गहरे काले रंग वाली सिर के बाल बिखरे रखने वाली माता के तीन नेत्र हैं, तथा इनके श्वास से अग्नि निकलती है।

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कालरात्रि मां दुर्गा का सातवां विग्रह स्वरूप ही है। इनके तीनों नेत्र ब्रह्मांड के गोले की तरह गोल हैं। इनके गले में विद्युत जैसी छटा देने वाली सफेद माला सुशोभित रहती है। इनके चार हाथ हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप भयानक है, लेकिन वे भक्तों को शुभ फल ही देती हैं। इनका वाहन गधा है। वह अपने भक्तों की रक्षा के लिए हथियार भी रखती हैं। योगी साधकों द्वारा कालरात्रि का स्मरण ‘सहस्रार चक्र‘ में ध्यान केंद्रित करके किया जाता है। माता उनके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए राह खोल देती हैं।

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माता कालरात्रि के पूजन से साधक अथवा भक्तजन के समस्त पाप धुल जाते हैं तथा उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कालरात्रि मां की चार हाथों में से दो हाथों में शस्त्र रहते हैं। एक हाथ अभय मुद्रा में तथा एक वर मुद्रा में रहता है। मां का ऊपरी तन लाल रक्तिम वस्त्र से तथा नीचे का आधा भाग चमड़े से ढका रहता है। मां की भक्ति से दुष्टों का विनाश होता है तथा ग्रह बाधा भी दूर हो जाती हैं। आज माता को सफेद पुष्प का माला अर्पित करें तथा सफेद मिष्ठान्न चढ़ाएं तो सर्वोत्तम लाभ प्राप्त होगा। आज माता को सफेद एवं लाल वस्त्र चढ़ाने से भी सर्वोत्तम लाभ प्राप्त होगा।

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