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नहीं रहे पूर्व मंत्री और मल्हनी विधायक पारसनाथ यादव, आज जौनपुर में निधन

पंकज तिवारी
-छह बार विधायक व दो बार रहें सांसद
-तीन बार यूपी में कैबिनेट मंत्री रहे
-लंबे समय से चले रहे थे बीमार
-शोक-संवेदना व्यक्त करने वालों की लगी कतार

जौनपुर। पूर्वांचल में ‘मिनी मुलायम’ कहे जाने वाले पूर्व सांसद और विधायक पारसनाथ यादव का आज शुक्रवार को जौनपुर शहर स्थित आवास पर उन्होंने पौने 1 बजे अंतिम सांस ली। वे मुलायम सिहं यादव के करीबियों के साथ पूर्वांचल में समाजवाद की पताका बुलंद रखने वालों में शुमार थें। छह बार विधायक, दो बार सांसद और तीन बार यूपी में कैबिनेट मंत्री रहे पारसनाथ यादव लंबे समय से बीमार चले रहे थे। उनके निधन से सपाईयों में जहां शोक की लहर फैल गयी है वहीं जौनपुर ही नहीं पूरा पूर्वांचल गम में डूब गया।


अपने चहेते विधायक के निधन की खबर मिलते ही पूर्व कैबिनेट मंत्री जगदीश नारायण राय, प्रदेश उपाध्यक्ष , उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ रमेश सिंह, नगर आवास विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव,पूर्व एमएलसी लल्लन यादव समेत भारी संख्या में सपा नेता और कार्यकर्ता आवास पर पहुंचकर अंतिम विदाई दिया।


गांव की पंचायत से लेकर देश की सर्वोच्च सदन तक का सफर करने वाले पारसनाथ यादव जनपद की राजनीति में सबसे लम्बी पारी खेली। वे सात बार विधायक रहे, दो सांसद तथा तीन बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे है। सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत किया था। 1985 विधानसभा चुनाव में पहली बार लोकदल से बरसठी से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। 1989 के चुनाव में दूसरी बार लोकदल से विधायक चुने गये। उस समय चंद्रशेखर समाजवादी जनता पार्टी की सरकार बनी थी। इस सरकार में पारसनाथ यादव को शिक्षा राज्यमंत्री बनाया गया। 1991 चुनाव में वे बरसठी सीट पर ही जनता दल से चुनाव लड़े इस चुनाव में उन्हे हार का मुंह देखना पड़ा था। 1993 में चुनाव में वे समाजवादी पार्टी के विधायक चुने गये। 1996 में मड़ियाहूं विधानसभा से सपा के एमएलए चुने गये। 1998 लोकसभा में वे सांसद चुने गये। 1999 लोकसभा आम चुनाव में पारसनाथ यादव भाजपा के चिन्मयानंद से चुनाव हार गये। चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हे संगठन की कमान सौपते हुए जिलाध्यक्ष बनाया। 2002 विधानसभा में उन्हे पुनः समाजवादी पार्टी मड़ियाहूं सीट पर उतारा था इस चुनाव में जनता ने उनके सिर पर जीत का सेहरा बांध दिया। हलांकि 2002 में बसपा की सरकार बनी लेकिन कुछ महीने बाद तख्ता पलटने के बाद समाजवादी की सरकार बन गयी। इस सरकार में पारसनाथ को कैबिनेट मंत्री बनाया। 2004 लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हे जौनपुर सीट पर पुनः प्रत्याशी बनाया। इस बार पारसनाथ अपने हार का बदला लेते हुए स्वामी चिन्मयानंद की पटखनी देकर दिल्ली पहुंच गये। 2009 लोकसभा चुनाव पारसनाथ यादव बसपा प्रत्याशी धनंजय सिंह से चुनाव हार गये। 2012 चुनाव में पारसनाथ यादव मल्हनी विधानसभा को अपना कार्य क्षेत्र बनाते हुए यही चुनाव लड़ा और सफलता भी हासिल किया। अखिलेश सरकार में वे कैबिनेट मंत्री बनाये गये। 2017 विधानसभी चुनाव भी वे मल्हनी से लड़े विपरित परिस्थियो में भारी बहुमत से चुनाव जीत गये।

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