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नागपुर में भाजपा को जिला परिषद चुनाव में मिली करारी हार, नितिन गडकरी के गढ़ में कांग्रेस का परचम

ब्यूरो आफिस
-31 सीट जीतकर कांग्रेस बनी सबसे बड़ी पार्टी
-आरएसएस के गढ़ के साथ गडकरी का गांव भी नागपुर में ही है
-तीन बार से जिला परिषद पर था भाजपा का कब्जा

मुम्बई। महाराष्ट्र व झारखंड में भाजपा को करारी शिकस्त के बाद वर्ष 2020 में पहले ही महिने में भाजपा को एक और जोरदार झटका लगा है। इस बार भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गढ़ नागपुर में पार्टी को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा है। नागपुर के धापेवाड़ा में हुए जिला परिषद के चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है।
वर्ष 2019 में जबरदस्त लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के 6 माह बाद ही भाजपा को झटके पर झटके पर लग रहा है। दो-दो राज्य गवानें के बाद अब इस बार भाजपा को नागपुर जिला परिषद चुनाव में बीजेपी को कांगे्रस ने शिकस्त दी है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गांव धपेवाड़ा नागपुर में ही पड़ता है। इस इलाके में नितिन गडकरी की वजह से बीजेपी की मजबूत पकड़ है। जिला परिषद चुनाव में 31 सीट जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है। मालूम हो कि नागपुर आरएसएस का भी गढ़ माना जाता है। नागपुर के धापेवाड़ा में हुए जिला परिषद के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। यहां धापेवाड़ा सीट से जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र डोंगरे को जीत मिली है। एक तरफ जहां महेंद्र डोंगरे को 9,444 वोट मिले, वहीं बीजेपी प्रत्याशी मोमकुवर को 5,501 वोट से ही संतोष करना पडा। मालूम हो कि जिला परिषद की धापेवाड़ा सीट तीन बार से बीजेपी के ही कब्जे में थी, लेकिन इस बार उन्हें कांग्रेस ने भाजपा से सीट छीन कर अपना परचम लहराया है। नागपुर जिला परिषद में कुल 58 सीटें हैं। इस चुनाव के लिए मंगलवार को वोट डाले गए थे। बुधवार को इन सीटों की मतगण़ना शुरू हुई थी। इन चुनावों में बीजेपी को बड़ी हार मिली है। जबकि 31 सीट जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है।

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