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नासा ने 20 जून को भारतीय छात्र उपग्रह “रमनसैट” को अंतररक्ष मेंभेजनेकी तैयारी की

यह खगोल विज्ञान और अंतररक्ष शिक्षा और प्रौद्योगगकी के क्षेत्र में काम करने वाले एक अग्रणी संगठन स्पेस इंडिया के लिए गर्व का क्षण है, जिसमे 17 वर्षीया छात्र, आभा सिक्का को एक मंच, मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की है, जो नासा के ओरियन टेरियर साउंड राकेट पर 20 जून 2019 को अंतरिक्ष में लांच करने के लिए बिलकुल तैयार है। प्रयोग को ले जाने वाले रॉकेट को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:00 बजे लॉन्च किया जायेगा। राकेट को अमेररका के
वर्जीनिया में स्थित नासा कीवालअपः फ़्लाइट फैसिलिटी से लॉन्च किया जाएगा और 116 किमी की ऊँचाई प्राप्त होगी और उडान लगभग 15 मिनट तक चलेगी।
छोटे घन आकार की जांच को रमनसैट नाम दिया गया हैऔर इसे श्री सचिन बह्म्म्बा, सीएमडी और स्पेस और अनुसन्धान टीमों की मेंटरशिप के तहत तैयार किया गया है। स्पेस इंडिया प्रयोग के लिए एक सक्षम राष्ट्रीय लैब की मदद भी ले रहा है।


20 जून को उड़न भरने का प्रायोड केवल स्पेस के युवा प्रशिछुओ द्वारा तैयार किये गए दो प्रयोगो में से एक है , जिसे “क्यूब्स ” इन स्पेस के नाम से आयोजित प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता के तहत अंतरिक्ष में लॉच करने का अवसर मिला है idoodleedu inc -नासा के सहयोग से अमेरिका स्थित कंपनी। दूसरा प्रयोग अंतरिक्ष में गमा विकिरण को उचाई के एक कार्य के रूप में मापेगा और इस साल अगस्त में उच्च उचाई वाले गुब्बारे पर 40 किमी की उचाई तक उड़ान भरेगा। ये दो प्रयोग क्यूब्स द्वारा दुनिया भर के प्रतिभागियों से प्राप्त किये गए 350 प्रयोग प्रस्तावो का हिस्सा थे, जिनमे से लगभग 160 को लॉन्च करने के लिए चुना गया था।
रामनसैट 4 सेमी x 4 सेमी मापता है और इसका व जन केवल 64 ग्राम है। छात्र का मार्गदर्शन करने और प्रयोग को सफलता पूर्वक प्रस्तावित करने , उसकी योजना बनाने और फिर अंत में इसे उड़ान तैयार होने के लिए विकसित करने में शामिल चुनौतियों को पूरा करने के लिए स्पेस इंडिया का एक रोमांच समय रहा। जांच को अत्याधुनिक सेंसर के साथ लगाया गया है, जिसका बिश्लेषण किया जायेगा ताकि विकिरण की मात्रा के लिए उनके विश्लेषण के बाद की उड़ान हो।

प्रयोग का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ साथ घातक अंतरिक्ष विकिरण से उपग्रहों के लिए अंतरिक्ष यात्रा को सुरक्षित बनाना है। रामनसेट धातु -सीसा की विकिरण परिरक्षण क्षमताओं का परिक्षण करेगा।
यह प्रयोग इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योकि भारत वर्ष 2022 में गगनयान पर अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तैयार है और अंतरिक्ष विकिरण सबसे महत्वपूर्ण है।
रामनसेट कलाम सत की सफलता का अनुसरण करता है, जसका नाम पूर्व भारतीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया था , जिसे चेन्नई की एक भारतीय हाई स्कूल टीम ने बनाया था , जिसने 2017 में एक ही कार्यक्रम में भाग लिया था। कलाम सात ने उसी बर्ष उड़ान भरी थी।
इस उपलब्धि के महत्व पर टिप्पणी करते हुए, श्री सचिन बहाम्बा ने कहा : “यह केवल स्पेस संगठन के लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए भी गर्व का क्षण है जब भारत के ऐसे युवा छात्र अंतरिक्ष में प्रयोगो को शामिल करने वाली परियोजना पर काम करने के लिए कैलिबर का प्रदर्शन कर रहे है। हम अपने छात्र को भाग लेने का ऐसा अवसर प्रदान करने के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल हुयी है , लेकिन अब एक ऐसे युब में प्रवेश किया है जहा अंतरिक्ष अन्वेषण स्कूल के छात्रो का डोमेन बन गया है इस अवसर के लिए धन्यवाद।
स्पेस इंडिया के बारे में ….
स्पेस इंडिया एक अग्रणी संगठन है , जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली में खलोग विज्ञानं और अंतरिक्ष विज्ञानं को लागू किया है। स्पेस ने अपनी स्थापना के बाद से पुरे भारत में स्कूली छात्रों कीकमी को सिखाया है। स्पेस का मानना है की हम प्रशिक्षित छात्रों को स्कूल में अपने अभिनव कार्यक्रमों जैसे अंतरिक्ष में खोज के माध्यम से अंतरिक्ष में भविष्य के लिए मानव जाती तैयार कर रहे है,अंतरिक्ष खोज कार्यशाला और अंतरिक्ष क्लब। हमारे छात्रों को उनके बेल्ट के तहत कई उपलब्धियां मिली है, जिनमे मुख्या बेल्ट में सूर्य की परिक्रमा करने वाले चार हज़ार से अधिक क्षुद्र ग्रहो की अंतिम खोजो शामिल है। यह दुनिया के किसी भी देश में स्कूली छात्रों द्वारा की गई खोजो की सबसे बड़ी संख्या है।

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