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पं दीनदयाल उपाध्याय का जीवन व मूल्य चुनौतियों से लडने की ताकत देता है: प्रो जी सी त्रिपाठी

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विजय श्रीवास्तव
-तिब्बती विश्वविद्यालय में ‘‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानवता, अन्त्योदय एवं ग्राम विकास‘‘ विषयक संगोष्ठी सम्पन्न
वाराणसी। काशी हिन्दु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जी.सी.त्रिपाठी ने कहा कि भारत का चिन्तन मौलिक है। यहंा की परम्परा नैसर्गिक एवं प्राकृतिक है। भारत की मिट्टी से निकलने वाली सभी धर्मो का सोच एक ही रहा है और वह रहा शान्ति समभाव व एकता। आज राष्ट्र के सामने आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक चुनौतियाॅ हैं जिनका समाधान भी अगर भारतीय संस्कृति के विरासत में देखा जाये तो निश्चय ही उसका समाधान मिलता दिखता है।

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भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में स्थित केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के अतिशा हाल में शुक्रवार को आयोजित पं दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानवता, अन्त्योदय एवं ग्राम विकास‘‘ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के पद से सम्बोधित करते हुए प्रो जी.सी.त्रिपाठी ने कहां कि पं दीनदयाल उपाध्याय ने आज की सभी चुनौतियों को रेखाकिंत करने का काम बहुत पहले कर दिया था। आज उनके जीवन व आदर्शो से हमकांे काफी पे्ररणा के साथ उन चुनौतियों से लडने की ताकत देती है।

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उक्त अवसर पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के संघ प्रचारक रत्नाकर ने कहा कि अगर हमने अपने देश को महान बनाया है तो बिगाडने का काम भी हमने ही बनाया है। जिसके चलते आज फिर उसे फिर से भारतीय संस्कृति एंव परम्परानुसार बनाने की जिम्मेदारी हमारी ही बनती है। हमें किसी को दुख नहीं देना है। हमारा हर काम  सकारात्क कार्यो के साथ जुडा होना चाहिए। यही पं दीनदयाल उपाध्याय की मंशा एवं जीवन का महत्वपुर्ण पडाव था। उक्त अवसर पर भदोही के सांसद विरेन्द्र सिंह मस्त ने कहा कि हमारा भोजन, बचन बोल सभी प्राकृतिक के अधाार पर होता है। हमारी कृषि जीवन धारा है। कृषि से व्यक्ति बना है। जब कि अन्य देशों में व्यवसाय मानते है। राष्ट्र की पहली इकाई परिवार हैं वर्तमान स्थिति में परिवार टूट रहा है। परिवार टूटने का खतरा देश को कमजोर कर रहा है। आय से बचत की परम्परा से जोडना चाहिए। बचत की परम्परा ही देश को स्वालम्बी बनाती है।

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अध्यक्षीय सम्बोधन में केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवांग समतेन ने कहा कि हमें संस्कृति एवं विद्या के बीच जीवन जीना है। पं दीनदयाल जी की जीवन बहु आयामी है। जिससे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
उक्त कार्यक्रम का संचालन जहां डाॅ रामसुधार मिश्र ने किया वहीं धन्यवाद ज्ञापन संघ के दीनदयाल पाण्डेय ने किया। उक्त अवसर पर संस्थाान के सैकडो की संख्या में तिब्बती छात्र व छात्राओं के साथ काफी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

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