पत्रकारिता आज कारपोरेट व राजनीति गलियारों में सिमट कर रह गयी है

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-प्रादेशिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनरतले हुई पत्रकारिता दिवस पर संगोष्ठी
वाराणसी। कभी आजादी का विगुल फूकने वाली पत्रकारिता आज निःसन्देह बेड़ियों में जकड़ कर रह गयी है। हमारे शब्द आज आजाद न होकर कहीं न कहीं कारपोरेट जगत के शब्द बन कर रह गये हैं। जिसका सबसे सीधा असर आज इलेैक्ट्रानिक्स मीडिया में देखा जा सकता है। पत्रकारिता आज मिशन न रहकर शुद्ध रूप से व्यवसायिकता के ढ़ाचे में ढ़ल चुकी है। आज उसे इससे बाहर निकलना होगा। यह जिम्मेदारी आज हम सब की है।
उक्त बातें आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर प्रादेशिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनरतले ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सारनाथ में आयोजित संगोष्ठी में संस्था के मीडिया प्रभारी विपिन भाई ने कही। इस दोैरान 24 टाइम्सटूडे के संपादक डाॅ आलोक कुमार ने कहा कि आज बड़ा पत्रकार वह है जिसके पास सभी संसाधन है, किसी घटना को बड़ा-चढ़ा कर सबके सामाने रखने में महारत हासिल रखता हो। जिसकी राजनीतिक गलियारों से लेकर कारपोरेट जगत तक में पहुंच हो। यूनाईटेड भारत के बृजेश गुप्ता ने कहा कि आज पत्रकारिता को अपने लव में लाने की जरूरत है। तभी समाज में अमन चैन स्थापित हो सकती है। इस दौरान एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष उमेश मोर्य  ने कहा कि आज पत्रकार पत्रकारिता के मापदंड को भूल चुके हैं। उन्हें अपने सीमा का ज्ञान नहीं रहा। जबकि उनकी कीमत किसी भी रूप से सीमा पर लड़ रहे उन सैनिकों से कहीं भी कम नहीं है जो सीमा पर हमारी देश की रक्षा करते है जबकि वहीं एक पत्रकार देश के अन्दर विकृतियों को दूर करने के लिए अपनी लेखनी के माध्यम से अनवरत लड़ता है। पत्रकारिता को धारदार बनाने जरूरत है। इसकी सच्चे अर्थो में जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकारों के साथ-साथ पत्रकार संगठनों की है।

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विचार गोष्ठी का संचालन करते हुए एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विजय श्रीवास्तव ने कहा कि आज पत्रकारों को आत्ममंथन, आत्मनिरिक्षण करने का समय है। पत्रकार को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। हमें कलम उठाने के पहले यह सोचना होगा कि हमारी लेखनी कहीं कारपोरेट जगत व राजनीतिक गलियारों के इर्द गिर्द तो नहीं उलझ कर रह गयी है। हमें उनसे बाहर निकलना होगा। इस दोैरान अन्य पत्रकारों ने भी अपने विचार व्यक्त किया। इस दौरान जहां एसोसिएशन की डायरी वितरित की गयी वहीं आगामी 1 जून को योग दिवस ब्रह्माकुमारी  ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ मिलकर मनाने का निर्णय लिया गया है।
उक्त अवसर पर सर्वश्री अवधेश दत्त पाण्डेय, कमलाकर श्रीवास्तव, सत्येन्द्र कुमार दूबे, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, अंजनी कुमार, कमलकर पाण्डेय आदि लोग उपस्थित रहे।

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