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पालि एंव बौद्ध धर्म जीवन जीने की कला सिखाता है

 

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-पालि व बुद्धिज्म पर सारनाथ में तीन दिवसीय अन्तर्राष्टीय संगोठी प्रारम्भ
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. युदनाथ प्रसाद दुबे ने कहा कि पालि एंव बौद्ध धर्म व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाता है। बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग तथा मैत्री-करूणा की भावना का अनुकरण कर विश्व में सुख, शान्ति तथा सद्भाव लाया जा सकता है। उक्त बातें आज भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ में महाबोधि सोसायटी आॅफ इण्डिया के 125 वीं वर्ष पूरे होने पर आयोजित पालि एवं बौद्ध धर्म विषय पर त्रिदिवसीय अन्तर्राष्टीय संगोठी के उद्घाटन के अवसर पर कही।
मूलगंध कुटी विहार परिसर में स्थित बोधि वृक्ष में के समीप आयोजित सेमीनार में विशिष्ठ अतिथि के पद से सम्बोधित करते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय, कोलकाता के कुलपति प्रो दिलीप कुमार मोहन्ती ने टैगोर व गांधी के दर्शन में बौद्ध धर्म के सिन्द्धान्तों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तथागत बुद्ध क विचार वर्तमान काल में प्रांसगिक है। आज जनमानस में बुद्ध के विचारों को प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए विश्व भारती विश्वविद्यालय, शान्ति निकेतन( पं. बंगाल)के प्रोफेसर सुनीति कुमार पाठक ने पालि तथा बौद्धधर्म के उद्भव, विकास, पतन तथा पुनस्र्थापना पर विस्तार से प्रकाश डाला। पद्यश्री प्रो. रामशंकर त्रिपाठी ने पालि तथा बौद्ध धर्म के उज्ज्वल भविष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान बुद्ध ने जिस धर्म को प्रवर्तित किया उसको आधार बनाकर दो परम्परा विकसित हुई। जिसमें से एक पालि को मानकर चली तो दूसरा संस्कृत को मानने वालें लोग थे। संस्कृत परम्परा में भारत के विद्धानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज इन्ही के कारण भारत में जगतगुरू के आसन पर विराजमान है। बुद्ध ही वास्तिविक रूप में जगतगुरू है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. संघसेन सिंह ने समतामूलक समाज की स्थापना में सुगत बुद्ध के योगदान पर बल दिया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्ज्वलन तथा पालि मंगलाचरण से हआ। संगोष्ठी के द्धितीय सत्र में प्रो. प्रद्युम्न दुबे, बीएचयू, प्रो. विजय कुमार सिंह, चण्डीगढ़, प्रो सुभ्रा वी पवगधी, दिल्ली, डाॅ ज्ञानादित्य शाक्य नोयडा, प्रो बेला भटटाचार्य कोलकाता, प्रो राजेश रंजन नालन्दा, प्रो राम नन्दन सिंह जम्मू ने अपने विचार व्यक्त किया। तृतीय सत्र में डाॅ. गौतम लामा बीएचयू, डाॅ अनिर्वन दास पुणे, डाॅ पेमा तेनजीन सारनाथ, डाॅ उज्जवल कुमार कोलकाता, आदि ने पालि तथा बौद्ध धर्म पर अपने विचार रखें।
समस्त कार्यक्रम का संचालन डाॅ रमेश प्रसाद, स्वागत भाषण महाबोधि सोसायटी आॅफ इण्डिया के महासचिव भन्ते पी सीवली थेरो, विषयोपस्थापन बीएचयू के प्रो. विमलेन्द्र कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन महाबोधि विद्या परिषद के अध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक ने किया।

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