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पावर कारपोरेशन कार्यालयों में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर कई वर्षों से अभियंता अधिकारियों का अवैध कब्जा

राकेश सिन्हा ”रजनीश“
-स्पष्ट निर्देश के बावजूद 5 वर्षों से लिपिकीय संवर्ग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के सभी 13 पद रिक्त
-प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव का आदेश की भी उड रही है धज्जियां
-अन्य पदों पर हो रहे है बिना रोक टोक के प्रमोशन
-कार्यकारी सहायक 30 से 35 वर्षों की सेवा के पश्चात भी सर्वोच्च पद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर नहीं हो पा रहे हैं प्रोन्नत
-अभियंता अधिकारियों के कुप्रबंध से कार्यालय कार्मिकों में हताशा एवं कुंठा व्याप्त

वाराणसी। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन एवं उसके अधीनस्थ निगमों में सब कुछ वर्षो से ठीक नहीं चल रहा है। नियम कानून व मानकों को ताक पर रख कर प्रमोशन व कार्यभार दिए जा रहे हैं। जिसका असर आज उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन एवं सभी निगमों पर साफ दिखाई दे रहा है। आज उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन एवं अधीनस्थ निगमों पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल एवं दक्षिणांचल के कार्यालय कार्मिकों के प्रमोशन के अंतिम सर्वोच्च पद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (मुख्य अभियंता एवं प्रबंध निदेशक कार्यालय के बड़े बाबू का आज के समय में शासन द्वारा यह नया पदनाम दिया गया है) के पदों पर पिछले कई वर्षों से अभियंता अधिकारियों का अवैध कब्जा है लेकिन इस बारें में नीचे से लेकर मंत्रालय तक कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।


गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन एवं अधीनस्थ निगमों पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल एवं दक्षिणांचल के प्रत्येक मुख्य अभियंता कार्यालय एवं कारपोरेशन कार्यालयों में मानक के अनुसार लगभग 35 पद हैं यह और बात है कि कारपोरेशन ने मात्र 13 पद को ही स्वीकृत माना है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि विगत 5 वर्षों से लिपिकीय संवर्ग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के सभी 13 पद रिक्त हैं और पावर कारपोरेशन, लखनऊ द्वारा अभी तक कोई प्रोन्नति नहीं की गई जबकि वहीं पर अवर अभियंता से सहायक अभियंता, सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता, अधिशासी अभियंता से अधीक्षण अभियंता, अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता-स्तर दो, मुख्य अभियंता-स्तर दो से मुख्य अभियंता-स्तर एक के पद पर आगामी 1 वर्ष में खाली होने वाले पदों पर लगभग प्रत्येक माह में प्रमोशन कर रहा है, इसी प्रकार अन्य सवंर्ग जैसे लेखा, विधि एवं मुख्यालय संवर्ग में प्रोन्नति लगातार किया जा रहा है।
यहां यह भी बताना उचित होगा कि पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष आलोक कुमार ने संघर्ष समिति की बैठकों में दो बार निर्देशित किया कि मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर तुरंत प्रोन्नति की जाए। स्पष्ट निर्देश के बावजूद पावर कारपोरेशन, लखनऊ के इंजीनियर प्रशासन द्वारा लगातार साजिश करके विगत 5 वर्षों से सभी 13 रिक्त मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, जो लिपिकीय संवर्ग के हैं, के पद पर प्रोन्नति नहीं की गई है तथा अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी उन पदों पर अवैध कब्जा कर उसका कार्य कर रहे हैं। अभियंता अधिकारियों के कुप्रबंध से कार्यालय कार्मिकों में हताशा एवं कुंठा व्याप्त है। प्रबंधन द्वारा कार्मिकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जहां अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता के पद पर अभियंता एक दिन भी कार्यरत हैं तो पावर कारपोरेशन, लखनऊ द्वारा उन्हें प्रोन्नति प्रदान कर दी जाती है, वही कार्यकारी सहायक 30 से 35 वर्षों की सेवा के पश्चात अपने अंतिम प्रोन्नति के सर्वोच्च पद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के सभी रिक्त पदों पर प्रोन्नति न करके उनके वैधानिक प्रोन्नति के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी संवर्ग के रिक्त पदों पर तुरंत प्रोन्नति की जाए लेकिन कारपोरेशन प्रबंध एवं अभियंता प्रशासन मात्र अभियंता अधिकारियों के रिक्त पदों पर ही प्रोन्नति कर रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है तभी कार्मिकों के पदोन्नति हो पाएंगे एवं उनमें को आई कुंठा दूर हो सकेगी।

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