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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सिडबी की स्वालबंन योजना फ्लाप

विजय श्रीवास्तव
-उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए सिडबी ने स्वावलंबन कनेक्ट केंद्रों की स्थापना की योजना बनाई थी
-पांच जिलों को जोड कर वाराणसी कलेस्टर बनाया गया था
-वाराणसी सहित अन्य जिलों में कनेक्ट केन्द्र की स्थापना की गयी थी
-कई बैंकों को सिडबी के स्वावलंबन योजना के बारें में जानकारी ही नहीं

वाराणसी। सरकार जन सामान्य के आर्थिक जीवन स्तर को उठाने के लिए समय-समय पर योजनाएं लाती हैं। आये दिन बेरोजगारों के अन्दर उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने व आसानी से लोन मुहैया कराने के लिए भी सरकार की दर्जनों योजनाए समय-समय पर लांच होती रहती है लेकिन अधिकतर योजनाए केवल समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक चैनलों की सुर्खिया बन कर रह जाती हैं। इसमें इन योजनाओं को फ्लाप करने में सबसे बडी भूमिका बैंको के आला अधिकारियों के उपेक्षात्मक रवैये के चलते होती है जिससे अधिकतर योजनाएं धरातल पर पहुचते-पहुचते ही दम तोड देती हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सिडबी (लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया) की स्वालंबन योजना आज पूरी तरह से फ्लाप साबित हो रही हैं। सिडबी व बैंकों के आला अधिकारियों बीच सही तालमेल न होने के वाराणसी कलेस्टर में अभी तक केवल 4-6 लोंगो को स्वालंबन योजना के तहत लोन मिल सका। सैकडों अभ्यर्थियों की फाइलें या तो बैंक के टेबुलों पर धूल फांक रही हैं या स्वालंबन योजना के तहत वे अब उम्मीद छोड चुके हेैं।


गौरतलब है कि उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए सिडबी ने स्वावलंबन कनेक्ट केंद्रों की स्थापना की योजना बनाई है। इसके तहत जिन पांच राज्यों को शामिल किया गया हैं वह है उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना। जिसके तहत देश के पांच राज्यों में 100 स्वावलंबन कनेक्ट केंद्रों की स्थापना की गयी। यह पहल सिडबी के मिशन स्वावलंबन के तहत किया गया था। जिसका उद्देश्य 7,000 उद्यमों को स्थापित करने में मदद करेगा और मौजूदा आजीविका व उद्यमों को विकसित करने के लिए भी सहायता प्रदान करेगा। स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया यानी सिडबी के इस योजना से लगा कि बेरोजगारों के लिए यह जो स्वावलंबन योजना है, उससे बेरोजगार भाईयों के लिए नयी राह खुल जायेगी। जहां उनके अपने सपने पूरे करने के लिए हर संभव मदद की जाएगी, फिर चाहे वो मार्गदर्शन की चाह हो या फिर बड़े उद्यमियों तक पहुंच बनाने की। इतना ही नहीं सिडबी पर एमएसएमई यानी छोटे व लघु उद्योगों के लिए ऋण भी दिलाने में पूरी मदद की जायेगी। यही नहीं सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आईएएस मोहम्मद मुस्तफा ने कहा था कि “यह पहल हमारी सिडबी विजन 2.0 का एक हिस्सा है जिसके तहत मिशन स्वावलंबन हमारी अम्ब्रेला इनिशिएटिव है। यह कदम जागरूकता से आगे बढ़ना है और उद्यमी सपनों को वास्तविकता में बदलने की सुविधा सुनिश्चित करना है। हमारा उद्देश्य युवाओं और अछूता व अयोग्य वर्गों को छूना है और न्यू इंडिया बनाने के लिए उन्हें विकसित करना है। यही नहीं सिडबी ने एक टोल-फ्री मिस्ड कॉल सेवा (1800-200-1265) भी शुरू की, जहां इच्छुक उद्यमी एंटरप्राइज सेटअप से संबंधित सहायता के लिए मिस्ड कॉल दे सकते हैं। यह सेवा साल भर पहले से शुरू भी हो गयी है लेकिन कई बैंकों को सिडबी के स्वावलंबन योजना के बारें में जानकारी ही नहीं हैं।


हैरत की बात यह रही कि पीएम मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तथा सीएम आदित्यनाथ योगी के गोरखपुर में ही यह योजना पूरी तरह से फ्लाप रही। साल भर पहले जब यह योजना शुरू हुई तब वाराणसी कलेस्टर के तहत चार जिलों के अन्तर्गत वाराणसी कनेक्ट केन्द्र पर ही लगभग 200 से अधिक बेरोजगार भाईयों ने आनलाइॅन फार्म भरें लेकिन सिडबी व बैंक अधिकारियों के उदासिनता सही तालमेल न होने के चलते जानकारी के मुताबिक केवल एक अभ्यर्थी का लोन पास हो सका है। इस प्राजेक्ट के शुरू हुए एक वर्ष होने को हेैं अगर एक वर्ष में पीएम के संसदीय क्षेत्र में एक अभ्यर्थी को लाभ मिलता है तो अन्य जिलों केेेेेेेे बारें मेंअंदाज लगाया जा सकता है। प्रश्न उठता है कि आखिर इस तरह के योजनाओं पर सरकार क्यों लाखों रूपये खर्च करती है। हर कनेक्ट सेन्टर को अभ्यर्थियों के आनलाइॅन करने पर भी सरकार 50 से 100 रूपये देती है। इसके साथ सिडबी के अधिकारियों के वेतन, टीए-डीए आदि पर लाखों रूपये के खर्च क्या राजस्व का बर्बादी नहीं तो और क्या है ?
इस सन्दर्भ में सिडबी के वाराणसी कलेस्टर प्रोग्राम आफिसर उत्कर्ष मिश्रा का कहना है कि ‘‘अपने स्तर पर अभ्यर्थियों को गाइड किया जा रहा है लेकिन बैंक अधिकारियों का सहयोग न मिलने के कारण लोन मिलने में दिक्कते आ रही हैं। वैसे वाराणसी में एक गोरखपुर में एक जौनपुर में एक सहित आधा दर्जन लोंगो का लोन फाइनल हो चुका है। शीघ्र ही कुछ और लोंगो का भी हो जायेगा। इसके लिए बैंक अधिकारियों से सम्पर्क किया जा रहा है।‘‘

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