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बसपा सुप्रीमो मायावती को पीएम बनाने का संकल्प, प्रदेश की राजधानी से कार्यकर्ताओं ने किया एलान

Mayawati

विजय श्रीवास्तव
-कोऑर्डिनेटर व कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
-कार्यक्रम में सुप्रीमो मायावती रही नदारत
-महागठबंधन को लग सकता है बडा झटका
लखनऊ। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को पुनः सत्ता में लाने के लिए पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। वहीं विपक्ष अभी तालमेल बैठाने में ही लगा है लेकिन इसी बीच बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पार्टी ने सोमवार को अपने सुप्रीमो मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लेकर भाजपा सहित विपक्षियों को हैरत में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने यह बड़ा दांव भाजपा के लिए कितनी बडी चुनौती साबित होगा यह अलग बात है लेकिन विपक्षियों के बीच चल रही एकता तो जोरदार झटका दिया है।

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सुप्रीमों मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला सोमवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी ऑडिटोरियम में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता के बीच लिया गया है लेकिन हैरत की बात यह रही कि इस घोषणा के समय मंच पर सुप्रीमो उपस्थित नहीं थीं। गौरतबल है कि सोमवार को लखनऊ में कोऑर्डिनेटर और सीनियर कार्यकर्ताओं की मीटिंग थी। जिसमें प्रधानमंत्री के रूप में मायावती का नाम रखा गया है। जिसे उपस्थित कार्यकर्ताओं ने तहे दिल से स्वीकार करते हुए उन्हें पीएम बनाने के लिए संकल्प लिया और साफ-साफ कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद मायावती को देश का प्रधानमंत्री बनाना है। यह केवल कार्यकर्ताओं का जोश नहीं वरन् इस बात को पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर वीर सिंह और जयप्रकाश सिंह ने मायावती को बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार कार्यकर्ताओं के सामने पेश किया।

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इस दौरान हाल ही में एमएलसी बनाए गए भीमराव अंबेडकर ने 1993 के गठबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि 2019 में एक बार फिर वैसे ही गठबंधन की आवश्यकता है। उन्होंने जोरदार शब्दों में कहा कि बहन मायावती को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाना है।
गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में सुश्री मायावती नहीं थी लेकिन बसपा जैसी कैडर युक्त व अनुशासित पार्टी में यह उम्मीद कदापि नहीं लगायी जा सकती है कि इतना बडा फैसला कम से कम कोऑर्डिनेटर व कार्यकर्ताओं के स्तर से  लिया जा सकता है। सबको मालूम है कि मायावती अपने समय में अपने ताकतवर मंत्रियों के खिलाफ एक्शन लेने में देर नहीं करती थीं। तो ऐसे में इतना बडा फैसला बिना उनकी सहमति से उठाया गया यह गले से नहीं उतरता है। यह भी हो सकता है कि इससे मायावती अपने पार्टी कार्यकर्ताओं व विपक्ष में मची खलबली को आकनें का प्रयास कर रही हैं। इसके लिए पूरे प्रदेश में जोनल कार्यक्रम 4 अगस्ता तक चलाए जायेंगे जिसमें नेशनल कोऑर्डिनेटर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मायावती को 2019 में प्रधानमंत्री बनाने के एजेंडे को सामने रखेंगे।

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बसपा के इस कदम से निश्चय ही महागठबधंन को झटका लगेगा। यह भी साफ है कि  इस बीच मायावती और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है लेकिन इस सच्चाई से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि केवल सपा व बसपा अपने बल पर 2019 मिशन को फतह कर लेगी। निश्चय ही उसे अन्य पार्टियों के साथ तालमेल करना होगा। बसपा व सपा का जनाधार कुछ ही राज्यों में है, जिनके बल पर केन्द्र की सत्ता हासिल नहीं किया जा सकती है। इसके लिए बसपा को अभी काफी प्रयास करने होंगे।

 

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