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बौद्ध अनुयायियों ने किया सारनाथ में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि का दर्शन

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विजय श्रीवास्तव
-मूलगंध कुटी विहार के 87 वीं वर्षगाठ पर चार दिवसीय कार्यक्रम प्रारम्भ
-तीन दिनों तक कर सकेंगे भगवान बुद्ध की अस्थि दर्शन के दर्शन
-पूरे सारनाथ को पंचशील झण्डों, फूल-मालाओं व विद्युत झालरों से सजाया गया
वाराणसी। मूलगंध कुटी विहार के 87 वर्ष पूरे होने पर चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत आज महाबोधि सोसायटी आॅफ इण्डिया के संयुक्त सचिव भिक्षु के मेघांकर थेरो के नेतृत्व में दर्जनों बौद्ध भिक्षुओं के भगवान बुद्ध के विधिवत पूजन अर्चन के साथ प्रारम्भ हुई। इस अवसर पर मूलगंध कुटी विहार परिसर में स्थित बुद्ध मन्दिर में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियां आज से तीन दिन के लिए दर्शनार्थ रखी गयी। जिसका आज देश-विदेश से आये हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजा किया। इस दौरान पूरे मूलगंध कुटी विहार, बोधि वृक्ष परिसर को विधिवत फूल-माला विद्युत झालरों से सजाया गया है।

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ज्ञातव्य है कि महोबोधि सोसायटी आॅफ इण्डिया प्रतिवर्ष इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करती है। इसी क्रम में आज से चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत हुई। जिसके उपलक्ष्य में पूरे सारनाथ को पंचशील झंडों से सजाया गया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन आज सुबह 6.30 बजे भगवान बुद्ध की विधिवत पूजा के साथ प्रारम्भ हुई। इसके बाद महाबोधि सोसायटी आॅफ इण्डिया के संयुक्त सचिव भिक्षु के मेघांकर थेरो के नेतृत्व में बुद्ध मन्दिर में अस्थि विशेष पूजा की गयी तत्पश्चात भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को बुद्ध मन्दिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया। जिसपर पूरा परिसर बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मं शरणम् गच्छामि की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। अस्थि दर्शन के लिए जापान, थाईलैण्ड, वियतनाम, श्रीलंका, कोरिया, म्यामार आदि देशों के बौद्ध अनुयायियों की लम्बी कतारें लगी थी। अपराह्न बौद्ध भिक्षुओं को कठिन चीवर दान के साथ भोजन दान कराया गया। रात को 8 बजे से श्रीलंका के कलाकारों द्धारा बनाए गये भव्य मंडप में दर्जनों बौद्ध भिक्षुओं द्धारा महापरित्राण पाठ का शुरू हुआ, जो पूरी रात चला।

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इस दौरान बोधि वृक्ष के समीप सैकड़ों दीप जलाये गये। शाम को ही मूलगंध कुटी विहार स्थित बुद्ध मन्दिर में विश्व शान्ति निमित्त भगवान बुद्ध की पुनः विधिवत पूजा की गयी। इस दौरान श्रीलंका, जापान, थाईलैण्ड आदि देशों के सैकड़ो बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। इस दौरान महाबोधि सोसायटी की तरफ से आने वालें बौद्ध अनुयायियों को कलैण्डर, जलपान आदि दिया गया।

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