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बौद्ध धर्मगुरूओं ने सारनाथ को बौद्ध तीर्थस्थल घोषित करने की मांग उठाई

विजय श्रीवास्तव
-सारनाथ में बोैद्ध भिक्षुओं के प्रति पूरी तरह से उदासीनता का आलम
-बौद्ध भिक्षुओं से खण्डहर परिसर में टिकट न लेने की मांग
-सारनाथ में सडक पर राड लगा कर रोकने से दूर से आए बौद्धों को होती है परेशानी

वाराणसी। आस्था व तपस्या की तपोभूमि सारनाथ से एक बार फिर बौद्ध धर्मगुरूओं ने सारनाथ को बौद्ध तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग सरकार से उठाई है। इस दौरान सारनाथ में अतिक्रमण, सारनाथ संग्रहालय के समक्ष सडकों को लोहे के राड से ब्लाक करने व गंदगी सहित अन्य मुद्दो पर भी चिंता व्यक्त की गयी। सारनाथ स्थित खण्डहर परिसर में बौद्ध भिक्षुओं से टिकट लेंकर प्रवेश पर भी बौद्ध धर्मगुरूओं ने नाराजगी जतायी।
सारनाथ स्थित म्यामार बौद्ध मन्दिर में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान उपस्थित म्यामार मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु वण्ण ध्वज व जम्बूद्धीप श्रीलंका बुद्धिष्ट टेंपल के विहाराधिपति डाॅ के सिरी सुमेध थेरो ने सयुक्त रूप से बताया कि आज सारनाथ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि सारनाथ की पहचान भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली के रूप में हैं। जिसके कारण ही यहां आज देश-विदेश से प्रत्येक वर्ष लाखों बौद्ध अनुयायियों के साथ अन्य लोग आते रहते हैं। जिनके कारण यहा आसपास के हजारों लोंगो को आजीविका भी चलती है। इसके साथ ही आज सारनाथ में दो दर्जन से अधिक विभिन्न देशों के बौद्ध मंदिर हैं। इस तरह से आज पूरे विश्व में सारनाथ की पहचान एक बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में है लेकिन वहीं हमारें देश में सरकार इसे पर्यटन स्थल रूप में विकसित करने में लगी है। यह कहीं से न्यायोचित्त नहीं है। डाॅ थेरो ने कहा कि आशापुर से लेकर सारनाथ तक आज सडकों के किनारें अतिक्रमण, गंदगी हैं। इसके साथ ही अधिकतर तीज-त्यौहारों पर पुलिस प्रशासन रंगोली गार्डेन पर ही वाहनों के आवागमन पर रोक लगा देती है। जिससे देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों को काफी परेशानी का सामना उठाना पडता है। एक ओर सरकार एयपोर्ट, रेलवे स्टेशन के साथ रिंग रोड का निर्माण करा रही है, जगह-जगह अतिथि देव भवः का बोर्ड लगा रही है वहीं दूसरी ओर सारनाथ पहंुचने पर उन्हें जगह-जगह रोक दिया जाता है। जिससे छवि खराब होती है।
धर्मगुरूओं ने खण्डहर परिसर में बौद्ध भिक्षुओं से पूजा के लिए भी टिकट लगाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आज विदेशों में कई स्थानों पर बौद्ध स्थल पर आज बौद्ध भिक्षुओं से कोई टिकट नहीं लिया जाता है। डाॅ थेरों ने कहा कि आज बौद्ध धर्म को कई देशों ने अपनाया है जिसके कारण बौद्ध धर्म एक अन्तर्राष्ट्रीय धर्म के रूप में स्थापित हो चुका है। ऐसे में जहां से यह धर्म उपजा वहीं इस तरह की उपेक्षा अच्छी बात नहीं है। बौद्ध धर्म गुरूओं ने कहा कि इस सन्दर्भ में शीघ्र एक कमेटी का गठन करेंगे जो सारनाथ को बौद्ध तीर्थस्थल के लिए प्रयास करेगा। इसके लिए जिला प्रशासन से लेकर केन्द्र तक ज्ञापन दिया जायेगा। इस दौरान केन्द्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान के प्रो. फुनचुक दोर्जे भी उपस्थित थे।

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