ब्रेंकिग न्यूज: बाबरी विध्वंस कांड में आडवाणी, उमा भारती, जोशी समेत 13 पर चलेगा आपराधिक मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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(विजय श्रीवास्तव)
-सुप्रीम कोर्ट से भाजपा सकते में
-दो साल में अन्दर पूरी होगी सुनवाई
-तीन का हो चुका है निधन
-कल्याण सिंह के राज्यपाल होने पर उनपर नहीं चलेगा मुकदमा
नई दिल्ली। आखिरकार बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती को तगड़ा झटका देते हुए कटघरा में खड़ा कर दिया।  शीर्ष अदालत ने मामले में आडवाणी, जोशी, विनय कटिहार, साध्वी, उमा भारती समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। हालांकि, इनमें से तीन का निधन हो चुका है। अदालत ने दो साल के अंदर सुनवाई पूरी करने समेत कई बड़े फैसले किए हैं।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसलो को पलटते हुए इन सभी लोगों पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने के आदेश दिये हैं। बुधवार को कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को चार सप्ताह के भीतर रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया जायेगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश पीसी घोष और न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन की संयुक्त पीठ ने मामले में सीबीआई की अपील पर यह फैसला सुनाया है। हालांकि कोर्ट ने मामले में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को राहत दी है।
गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस का मामला 6 दिसंबर 1992 का है. जब हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया, जिसके बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए. सीबीआई ने कोर्ट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती सहित 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलने की मांग की थी। सीबीआई की ओर से पेश वकील नीरज किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि रायबरेली की कोर्ट में चल रहे मामले को भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर ज्वाइंट ट्रायल चलाया जाए।
छह अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश नरीमन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले के कई आरोपी पहले ही मर चुके हैं और ऐसे ही देरी होती रही तो कुछ और कम हो जाएंगे। इस दौरान आडवाणी के वकील के के वेणुगोपाल ने मुकदमा ट्रांसफर करने का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे केस ट्रांसफर नहीं कर सकती है। रायबरेली में मजिस्ट्रेट कोर्ट है, जबकि लखनऊ में सेशन कोर्ट इस मामले को सुन रहा है। इस दौरान कोर्ट ने कहा था, ‘हम इस मामले में इंसाफ करना चाहते हैं. एक ऐसा मामला, जो 17 साल से सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी की वजह से रुका है। इसके लिए हम संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करके आडवाणी, जोशी समेत सभी 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत फिर से ट्रायल का आदेश दे सकते हैं। साथ ही मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर सकते हैं. 25 साल से लटके इस मामले को हम डे-टू-डे सुनवाई करके दो साल में खत्म कर सकते हैं।’

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