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ब्रेकिंग न्यूज़- बिहार में बवडंर: नीतीश ने सीएम पद से दिया इस्तीफा, भाजपा ने दिया बिना शर्त समर्थन की घोषणा

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विजय श्रीवास्तव
-पीएम मोदी ने ट्वीट कर सराहा नीतिश के कदम को
-नीतिश ने भी कहा शुक्रिया
-बिहार में राजनीति सरगर्मी तेज
-लालू यादव ने नीतिश को कहा हत्यारोपि
पटना/वाराणसी। लगभग एक माह से बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच चल रहे राजनीति ड्रामा का अन्त आखिर कार नीतिश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा से हुआ। बदलते राजनीति घमासान में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने बुधवार शाम राज्यपाल से मिलकर उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। इसी के साथ ही 20 महीने से चल रही महागठबंधन (जेडीयू-कांग्रेस-आरजेडी) की सरकार का अंत हो गया। बदलते राजनीति समीकरण के तहत भाजपा ने बिना देरी किए बिना किसी शर्त के समर्थन की घोषणा कर दी है। एक ओर जहां पीएम मोदी ने नीतिश कुमार को इस फैसले के लिए बधाई दी वहीं नीतिश ने भी मोदी को शुक्रिया कर भाजपा से समर्थन लेने की ओर संकेत दे दिया है।
गौरतलब है कि जब से भ्रष्टाचार को लेकर लालू यादव व उनके डिप्टी सीएम पुत्र तेजस्वी यादव व पुत्री मींसा यादव पर शिकंजा कसा जा रहा था। तब से ही राजनीति विशेषज्ञ यह अनुमान लगाने लगे थे कि बिहार के राजनीति में एक बार फिर बवंडर आ सकता है। जिसकी परिणति आज नीतिश कुमार को अपने इस्तीफा से हुई। नीतिश के इस्तीफा देते ही बीजेपी ने तत्काल बिना देरी किए बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने साफ कर दिया कि वह नीतीश को एनडीए का नेता चुनने के लिए तैयार हैं। सुशील मोदी ने कहा कि उन्हें नीतीश कुमार पर पूरा भरोसा है। सुशील मोदी ने ये भी कहा है कि बीजेपी सरकार में शामिल होगी।
उधर नीतिश के इस्तीफा देते ही लालू यादव पूरे तरह से हमलावर हो चुके हैं। आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव भी मीडिया के सामने आए और नीतीश कुमार पर कई संगीन आरोप लगा डाले। नीतीश कुमार पर विभिन्न धाराओं के तहत लगे आरोपों की सूची बताते हुए आरजेडी सुप्रीमो ने कहा, नीतीश कुमार के खिलाफ मर्डर केस दर्ज है, जिसमें उन्हें उम्र कैद की सजा भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने खुद चुनावी हलफनामे में 302 और 307 की धारा के तहत केस की बात स्वीकारी थी। नीतीश को पता था कि वे बचेंगे नहीं, वह उम्रकैद और फांसी की सजा से डर गए, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया।
 बहरहाल बिहार के राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। यह कब और कैसे थमेगा। यह अभी कहा नहीं जा सकता है। इससे किसको लाभ होगा और किसकों हानि होगी, यह भी चिंतनन व मनन का विषय है लेकिन इससे यह बात साफ है कि इससे सबसे अधिक लाभ जहां भाजपा को दिखता दिख रहा है वहीं दूसरी ओर महागठबंधन को इस प्रकरण से करारा झटका लगा है। इससे नीतिश का कद बढ़ेगा या कम होगा। यह भी मंथन का विषय है लेकिन राजनीति विशेषज्ञ यह मानते है कि अब एक ओर जहां इस प्रकरण से महागठबंधन कमजोर होगा वहीं दूसरी ओर नीतिश कुमार की कुडली में जहां प्रधानमंत्री का पद कहीं अगर टिमटिमा रहा था तो अब उस पर विराम अवश्य लग गया है क्योंकि भाजपा में शामिल हो कर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुचना कम से कम मोदी के मौजूदगी में असंभव है।

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