भगवान बुद्ध के उपदेशों की प्रांसगिता आज और अधिक: कृष्ण प्रसाद

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(विजय श्रीवास्तव)
-भगवान बुद्ध के 2561 वें बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ में विविध कार्यक्रम
-पर्यटन विभाग व बौद्ध संगठनों के 21 हजार दीपों से जगमगाया सारनाथ
-बौद्ध संगठनों ने निकला धम्म यात्रा
वाराणसी। आज विश्व में जिस तरह से अराजकता व हिंसा बढ़ रही है। ऐसे में भगवान बुद्ध के उपदेशों प्रासंगिता आज और बढ़ गयी। भगवान बुद्ध शान्ति के दूत हैैं। विश्व में शान्ति से बड़ा और कुछ नहीं हैं। बुद्ध मानव जीवन में उस उजाला  की तरह हैं जो सदैव चमकता रहता है। आज जो बुद्ध के जो अनुयायी हैं और जो नहीं है उन्हें भी कम से कम भगवान बुद्ध के उपदेशों व विचारों से जुड़ना व समझना चाहिए।
उक्त बातें आज आस्था व तपस्या की तपोभूमि सारनाथ में भगवान बुद्ध केे 2561 वें जयन्ती व बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित बोधि वृक्ष परिसर में कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए भारत में नेपाल के उप उच्चायुक्त कृष्ण प्रसाद डकाल ने कहीं। उन्होंने कहा कि  भारत व नेपाल दोनों देशो को आज भगवान बुद्ध के पवित्र भूमियों के संरक्षण व संर्वधन के के लिए साथ मिलकर कार्य करना चाहिएं। बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बनी में हुआ था जिससे आज नेपाल की धरती पवित्र हो गयी। नेपाल में कई ऋृषि मुनियों ने जहां जन्म लिया वहीं कई गं्रन्थ लिखे गये। नेपाल की पवित्र धरती की एक विशेषता धार्मिक अहिष्णुता है, मैं हिन्दु होने के बावजूद भगवान बुद्ध में गहरी आस्था व मंदिरों में जाता हूं। नेपाल में आज 10 प्रतिशत लोग बुद्धिस्ट हैं लेकिन उसके बावजूद अधिकतर लोग आज बुद्ध में आस्था रखते हेैं। सम्राट अशोेक ने लुम्बनी में चार विहार बनवाये हैं। जो आज एक धरोहर हैं। आज यह हर्ष का विषय है कि भारत व नेपाल एक बुद्ध सर्किट पर साथ मिलकर काम कर रहें हैं जिससे लुम्बिनी को साथ भारत के बौद्ध स्थालों को एक साथ जोड़ने में मदद मिलेगी।
उक्त अवसर पर महात्मा गंाधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि भगवान बुद्ध ने जो उपदेश दिया वह आज भारत की दहलीज लांघ कर पूरे विश्व में फैल चुका है। गुप्त पीरियड में बुद्धिज्म चरम पर था। कालान्तर में बुद्धिज्म में थोड़ी स्थिरता आयी लेकिन फिर धीरे-धीरे आज बुद्धिज्म पूरे विश्व में अपनी अलख जगा रहा है। आज आवश्यकता है बुद्ध के उपदेशों पर मनन कर उन्हें जीवन में उतारने की तभी विश्व शान्ति की दिशा में हमारा प्रयास सार्थक हो सकेगा। बौद्ध उपासक शुद्धोधन राम सहाय ने कहा कि हर आदमी को कुशल कर्म करना चाहिए। इसी से देश समाज में शान्ति स्थापित हो सकेगी। चित्त को शुद्ध रखना चाहिए यही बुद्ध का सार है।
उक्त अवसर पर यश पुरस्कार से सम्मान्ति व महाबोधि विद्या परिषद के अध्यक्ष प्रो राम मोहन पाठक, वरिष्ठ अधिवक्ता एल के चन्दानी, ए के बरूआ,  महाबोधि बोधि सोसायटी के सचिव भिक्षु मेघांकर, क्षेत्रिय पर्यटन अधिकारी रवीन्द्र मिश्रा सहित अन्य लोंगो ने सम्बोधित किया किया। संचालन महाबोधि इन्टर कालेज के प्राचार्य डाॅ बेनी माधव ने किया।
इससे पूर्व धर्मचक्र विद्या विहार, अशोक मिशन एजूकेशन सोसायटी सहित अन्य कई बौद्ध संगठनों के तत्वावधान में सैकड़ों की संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्कूल के छात्र-छात्राए, बौद्ध उपासक हाथों धम्म झंडा के साथ विशाल धम्म यात्रा निकाला गया जो मवइया स्थित धर्मचक्र बौद्ध विहार से प्रारम्भ होकर विभिन्न मागों से होते हुए सारनाथ स्थित मूलगंध कुटि बिहार पहुंच कर समाप्त हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से सबकों मिष्ठान वितरण किया गया। शाम को पयर्टन विभाग व बौद्ध संगठनों की तरफ से पूरे बुद्ध स्थली सारनाथ में 21 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए गयें। इस दौरान पूरे सारनाथ को फूल मालाओं से सजाया गया था।

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