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भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि का दर्शन कर अभिभूत हुए बौद्ध अनुयायी

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विजय श्रीवास्तव
-महाबोधि सोसायटी आफ इण्डिया के 126वर्ष पूरा होने पर विविध कार्यक्रम
-अस्थि दर्शन का तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रारम्भ
-पूरे सारनाथ को पंचशील झण्डों, फूल-मालाओं व विद्युत झालरों से सजाया गया

वाराणसी। आस्था व तपस्या की तपोभूमि सारनाथ इस समय पूरी तरह से बुद्धमय हो गयी है। देश-विदेश से आये बौद्ध अनुयायियों से पूरा सारनाथ गुलजार हो उठा है। चारों तरफ बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मं शरणम् गच्छामि की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा है। चार दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरूआत आज भगवान बुद्ध के विधिवत पूजन अर्चन के साथ हुआ। इस अवसर पर मूलगंध कुटी विहार परिसर में स्थित बुद्ध मन्दिर में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियां आज से तीन दिन के लिए दर्शनार्थ रखी गयी। जिसका देश-विदेश से आये हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजा किया। इस दौरान पूरे मूलगंध कुटी विहार को विधिवत फूल-माला विद्युत झालरों से सजाया गया है।

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महाबोधि सोसायटी आफ इण्डिया के 126 वर्ष पूरा होने पर सारनाथ में विगत वर्षो की भाति इस वर्ष भी चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मालूम हो कि मूलगंध कुटी विहार के 86 वर्ष पूरे हुए हैं। जिसके उपलक्ष्य में पूरे सारनाथ को पंचशील झंडों से सजाया गया है। महाबोधि सोसायटी आफ इण्डिया के संयुक्त सचिव भिक्षु मेंघाकर भन्ते ने बताया कि आज सुबह चार दिवसीय दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन आज सुबह 5 बजे भगवान बुद्ध की विधिवत पूजा के साथ कठिन चीवर पूजा की गयी। इसके बाद बुद्ध मन्दिर में अस्थि विशेष पूजा की गयी तत्पश्चात भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को बुद्ध मन्दिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया। जिसपर पूरा परिसर बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मं शरणम् गच्छामि की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।

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दर्शन के लिए जापान, थाईलैण्ड, वियतनाम, श्रीलंका, कोरिया, म्यामार आदि देशों के बौद्ध अनुयायियों की लम्बी कतारें लगी थी। दर्शन पूजन का कार्यक्रम अपराह्न 10.30 बजे तक चला। अपराह्न 11 बजे बौद्ध भिक्षुओं को संघदान व भोजन दान कराया गया। जबकि बौद्ध भिक्षुओं द्धारा मूलगंध कुटी विहार सहित बोधि वृक्ष परिसर में सैकडों कैडिंल जलाया गया। शाम को ही मूलगंध कुटी विहार स्थित बुद्ध मन्दिर में विश्व शान्ति निमित्त भगवान बुद्ध की पुनः विधिवत पूजा की गयी। इस दौरान श्रीलंका, जापान, थाईलैण्ड आदि देशों के सैकड़ो बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। इस दौरान महाबोधि सोसायटी की तरफ से आने वालें बौद्ध अनुयायियों को कलैण्डर, जलपान आदि दिया गया। 

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