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भगवान शिव का सोववार व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है : पं. प्रसाद दीक्षित

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पं. प्रसाद दीक्षित
न्यासी एवं धर्म-कर्म विशेषज्ञ
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी।
-पचांग सोमवार 30 जुलाई से रविवार 05 अगस्त 2018 तक
-श्रावण मास में बिल्वपत्र, धतूरा, मदार का, गाय का दूध चढ़ाने का है विधान
वाराणसी। श्रावण मास की शुरूआत 28 जुलाई से प्रारम्भ हो चुकी है। जबकि श्रावण मास में प्रथम सोमवार 30 जुलाई को है।  श्रावण मास में सोमवार का अध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व होता है। श्रावण मास में आशुतोष भगवान शंकर की पूजा व दर्शन विशेष फलदायी होता है। जो प्रतिदिन पूजन ना कर सके उन्हें सोमवार को शिव पूजा अवश्य करनी चाहिए तथा व्रत रखने का विधान है। सोमवार भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। अतः सोमवार को शिव आराधना करना चाहिए। इसी प्रकार मास में श्रावण मास भगवान शंकर को विशेष प्रिय है। अतः श्रावण मास में प्रतिदिन की उपासना का विधान है। सावन में पार्थिव शिव पूजा का विशेष महत्व है, अतः प्रतिदिन सोमवार तथा प्रदोष को शिव पूजा या पार्थिव शिव पूजा अवश्य करनी चाहिए।

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श्रावण मास में लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ कराने का विधान है। सावन मास में जितने भी सोमवार पड़ते हैं उन सब में शिव जी का व्रत किया जाता है। इसमें गंगा स्नान अथवा किसी पवित्र नदी या सरोवर में अथवा विधि पूर्वक घर पर ही स्नान करके शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग या अपने घर में पार्थिव मूर्ति बनाकर यथाविधि षोडशोपचार पूजन किया जाता है। यथासंभव विद्वान ब्राह्मण से रुद्राभिषेक भी कराना चाहिए। इसमें श्रावण मास महात्म और शिव महापुराण की कथा सुनने पर सर्वोत्तम लाभ प्राप्त होता है। पूजन के पश्चात ब्राह्मण भोजन कराकर एक बार ही भोजन करने का विधान है। भगवान शिव का व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। भगवान शिव को श्रावण मास में बिल्वपत्र, धतूरा, मदार का, गाय का दूध चढ़ाने का विधान है। भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जो भक्तगण सावन माह में भगवान शिव की सविधि पूजन करता है, वह मरणोपरांत शिवलोक को प्राप्त कर होता है।

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पंचांग: सोमवार 30 जुलाई से रविवार 05 अगस्त 2018 तक
जुलाई-अगस्त 2018,
श्रावण कृष्ण पक्ष 1940
विक्रम संवत 2075
सोमवार 30 जुलाई- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि समस्त, भद्रा शाम 5.07 से प्रारंभ, श्रावण सोमवार व्रत
मंगलवार 31 जुलाई- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि प्राप्त 5.53 तक, तदुपरांत चतुर्थी तिथि प्रारंभ, भद्रा प्रातः 5.53 तक, संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, मंगला गौरी पूजन
बुधवार 01 अगस्त- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि प्रातः 6.54 तक तदुपरांत पंचमी तिथि प्रारंभ, तिलक स्मृति दिवस
गुरुवार 02 अगस्त- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि प्रातः 7.31 तक, नाग पंचमी (बंगाल), मधुश्रावणी व्रत आरंभ, हरदेवी पूजा (जयपुर)
शुक्रवार 03 अगस्त- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि प्रातः 5.35 तक, भद्रा प्रात 7.35 से रात्रि 7.21 तक
शनिवार 04 अगस्त- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 7.01 तक, शीतला सप्तमी (उड़ीसा)
रविवार 05 अगस्त- श्रावण मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रातः 6.12 तक

 

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