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मानदेय हड़पने पर स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

Corruption
विजय श्रीवास्तव
-श्री खंडेश्वरी बाबा इंटर कालेज, चांदपुर का मामला
-हाईस्कूल में अंशकालिक अध्यापक के नाम पर फर्जी ढंग से मानदेय का मामला
वाराणसी। वाराणसी जनपद के एक इंटर कालेज में फर्जी ढंग से अध्यापक के नाम से मानदेय हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। उक्त वाकया चांदपुर स्थित श्री खंडेश्वरी बाबा इंटर कालेज का है। जिसमें हाईस्कूल में फर्जी ढंग से एक अंशकालिक अध्यापक को मिलने वाले मानदेय को फर्जी नाम से दूसरे के बैंक खातें में ट्रांसफर कर राजस्व चोरी का मामला है। उक्त प्रकरण के शिकायत पर कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार 40 वर्ष से एक संस्था के माध्यम से उक्त इन्टर कालेज का संचालन किया जा रहा था। जिसमें 20 वर्ष पूर्व से आजीवन सदस्य के रूप में प्रभात रंजन बीच में स्कूल का प्रबन्धक भी रहा, ने आरोप लगाया है कि संस्था के कुछ लोग स्कूल व संस्था के सम्पत्तियों को फर्जी ढंग से हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम स्कूल में अभियुक्तगण 12 सितम्बर 2016 को हाईस्कूल में अशंकालिक शिक्षक के नाम पर फर्जी नाम व पता पर इन्दुकुमार सिंह, सा 30/2 अकथा सारनाथ का जिक्र करते हुए फर्जी बैंक खाता नम्बर देकर मानदेय को अभियुक्तगण द्धारा हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। जिसपर उसने सारनाथ थाना सहित एसएसपी को इस सन्दर्भ में लिखित सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाही न किए जाने पर प्रभात रंजन ने न्यायालय की शरण ली जिसपर कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट,कोर्ट संख्या-3 ने सम्बधित थाने को प्रबन्धक व प्रधानाचार्य के विरूद्ध मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।  
   सूत्र बताते है कि यह मामला किसी एक विद्यालय का नहीं कई स्कूलों में प्रबंधक व प्रधानाचार्य की मिली भगत से फर्जी ढंग से अपने करीबियों व  अन्य लोंगो को अशंकालिक अध्यापक नाम पर फर्जी ढंग से उनका मानदेय हड़पने का काम हो रहा है। गौरतलब है कि जब से सरकार ने निजी स्कूलों के अशंकालिक अध्यापकों को भी मानदेय देने का निर्णय लिया है तब से प्रबंधक व प्रधानाचार्य अपने करीबियों को अंशकालिन अध्यापक दिखा कर मानदेय दिलाने में लगे हैं। जबकि उनके ये करीबी कभी स्कूल मंे झाकने भी नहीं जाते हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि स्कूल तंत्र यह काम इस लिए भी कर रहे हैं कि कहीं सरकार भविष्य में इन अंशकालिक अध्यापकों पर और मेहरबान होते हुए कुछ और सहूलियत भी दे सकती हैं तो उनके रिस्तेदारों व अपने लोंगो को भला होगा। इसके लिए सरकार अगर ऐसे निजी विद्यालयों की गंभीरता से जांच कराये तो कई स्कूलों में चल रहे गोरखधंधा से पर्दा उठ सकता है।

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