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मोदी के गढ में फिर चुनौती दे सकते हैं केजरीवाल, दमदार प्रत्याशी के रूप में उतार सकता है महागठबंधन

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विजय श्रीवास्तव
-अरविन्द केजरीवाल से मिला सकती है कांग्रेस से हाथ
-मोदी के खिलाफ वाराणसी से संयुक्त रूप से दमदार प्रत्याशी उतारने की तैयारी
-25 जून से वाराणसी से आम आदमी पार्टी करेगी शंखनाद
वाराणसी। यूपी में गोरखपुर, इलाहाबाद व कैरोना लोकसभा सीट पर विपक्षी एकता को मिली शानदार विजय ने जहां विपक्ष को चुनाव में विजय श्री का फार्मूला दे दिया वहीं भाजपा की बैचेनी बढा दी है। सांझा विपक्ष का मोदी को रोकने की मुहिम को इस विजय ने संजीवनी का काम किया है। केन्द्र की सत्ता में यूपी व बिहार का सदैव दखल रहा है। विगत दिनों यूपी में जहां भाजपा को पराजय का स्वाद चखना पडा वहीं बिहार में भी मिली पराजय नीतीश कुमार की कुर्सी को हिला कर रख दिया है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में मोदी के गढ वाराणसी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के फिर से ताल ठोकने की चर्चा ने भाजपा की नींद उडा दी है। इतना ही नहीं अरविन्द केजरीवाल को इस बार संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी रूप में उतारने की विपक्ष ने जोरदार तैयारी शुरू भी कर दी है। अगर ऐसा हुआ तो मोदी व केजरीवाल एक बार फिर आमने-सामने होंगे।
राजनीति सूत्रों से छन कर आ रही है खबरों के बीच दिल्ली में कांग्रेस ने इसके लिए अपने घोर विरोधी केजरीवाल से दोस्ती के हाथ बढाने शुरू भी कर दिए हैं। इसका संकेत दिल्ली में लोकसभा के 7 सीट पर समझौते को लेकर आप व कांग्रेस के बीच हालिए बयान को देखने से मिलता है। दिल्ली में भाजपा भी जानती है कि अगर आप व कांगे्रस मिल कर चुनाव लडते हैं तो उनके लिए दिल्ली की डगर आसान नहीं होगी। वैसे कर्नाटक में हुए चुनाव के बाद से कांग्रेस ने भी अब यह सबक अच्छी तरह से ले लिया है कि अगर उसे केन्द्र की राजनीति करनी है तो उसे स्टेट की राजनीति में वहां के सशक्त राजनीति पार्टी के साथ ‘‘गिव एण्ड टेक‘‘ का फार्मूला अपनाना होगा। इसके लिए भले ही उसे थोडी बहुत अपना नुकसान भी करना पडे। विपक्ष की इस बार कोशिश होगी कि भाजपा के स्टार नेताओं के खिलाफ कम से संयुक्त व दमदार प्रत्याशी खडा किया जाये। जिससे वह अपने सीट को बचाने में ही परेशान रहें। इसके लिए पीएम नरेन्द्र मोदी के गढ को भी विपक्ष टारगेट कर रहा है। गौरतलब है कि 2014 में वाराणसी से मोदी के खिलाफ आम आदमी पार्टी से अरविन्द केजरीवाल खडे थे और अन्य पार्टियों यहंा तक की कांगे्रस को भी पीछे छोडते हुए 2 लाख से अधिक वोट हासिल करने में सफल रहें। विपक्ष यह मान कर चल रहा है कि मोदी के खिलाफ केजरीवाल दमदार प्रत्याशी हो सकते हैं। इसके लिए उसने राजनीतिक शतंरज की गोटिया बिछानी भी शुरू कर दिया है। जिसका आगाज कर्नाटक के सीएम कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण के दौरान देखने को मिला। मंच पर अरविन्द केजरीवाल ने भी शिरकत कर यह संदेश देने की कोशिश की कि उन्हें महागठबंधन का हिस्सा बनने में कोई गुरेज नहीं है। उसके बाद से आप व कांग्रेस दोंनो के एक दूसरे के प्रति आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगभग थम गया है।
मोदी के गढ से विपक्ष के सांझा उम्मीदवार के रूप में केजरीवाल के खडें होने खबर केवल हवा में नहीं दिख रही है, वरन् 25 जून को आम आदमी पार्टी के आपातकाल दिवस के मौके पर संजय सिंह के वाराणसी से जन अधिकार आंदोलन की उदघाटन को इसकी पटकथा की शुरूआत के रूप में देखा जा रहा है। इस आंदोलन के दौरान भाजपा से नाराज चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, नये मंच बना चुके और बीजेपी से तौबा कर चुके यशवन्त सिन्हा सहित अन्य नेताओं के शिकरत करने की संभावना है। इलाहाबाद में एक कार्यक्रम में आप के संजय सिंह ने कहा कि मोदी आपातकाल के प्रतीक हैं और यह अभियान लोकतंत्र बचाने के लिए है। जिसका समापन 8 जुलाई को जयप्रकाश नारायण के गांव खिताब दियारा में होगा। इस समापन समारोह में यह उम्मीद भी जतायी जा रही है कि इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण घोषणाए भी हो सकती हैं। इस कार्यक्रम से माध्यम से वाराणसी सहित प्रदेश में हासिए पर चल रहे आम पार्टी को संजीवनी भी देने की कोशिश होगी। इसके साथ ही आप के संजय सिंह के एक बयान ने भी इस बात की ओर काफी हद तक संकेत किया कि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या केजरीवाल मोदी के खिलाफ वाराणसी से फिर चुनाव लडेंगे। इस पर उनका यह कहना कि अभी इसका फेसला नहीं किया गया है और यह महागठबंधन तय करेगा। वैसे अभी तक आप ने अपना पत्ता नहीं खोला है लेकिन दिल्ली में सीएम केजरीवाल को अब लगने लगा है कि अगर दिल्ली में अपना कब्जा बरकार रखना है तो उन्हें महागठबंधन का हिस्सा बनना होगा। बहरहाल राजनीति गलियारों से आ रही इस खबर की सुर्खियों ने वाराणसी सहित प्रदेश का राजनीति तापमान अवश्य बढा दिया है।

 

 

 

 

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