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मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव मंजूर, शुक्रवार को होगी वोटिंग व चर्चा

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डाॅ आलोक कुमार/विजय श्रीवास्तव
-मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव
-स्पष्ट बहुमत होने के कारण मोदी सरकार के सेहत पर कोई असर न पडने की उम्मीद
नई दिल्ली/वाराणसी। संसद में माॅनसून का पहला दिन ही मोदी सरकार के लिए परीक्षा की घडी साबित हुई । टीडीपी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया। अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा और वोटिंग होगी। वैसे मोदी सरकार के लिए यह कोई घबराने की बात नहीं है। उनके पास स्पष्ट बहुमत है। थोडी बहुत इधर बीच अपने की घटकों के नाराजगी के चलते थोडी बहुत परेशानी उठानी पड सकती है लेकिन उसके बावजूद मोदी सरकार के सेहत पर कोई असर नहीं पडने वाला है। लोकसभा में अब तक 26 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए।

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गौरतलब है कि बुधवार को संसद का सत्र शुरू होने पर लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ टीडीपी द्धारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सुमित्रा महाजन ने 50 से ज्यादा सांसदों के समर्थन की गिनती कर उसके बाद उन्होंने व्यवस्था दी कि अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा और वोटिंग होगी। इस प्रस्ताव को कांग्रेस सहित अन्य कई विपक्षी पार्टियों ने अपना समर्थन दिया है।

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अविश्वास प्रस्ताव वैसे किसी भी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा की तरह होती है लेकिन वर्तमान समय में लोकसभा के कुल 535 सांसद में बीजेपी के पास अकेले 273 सांसद हैं और बहुमत के हासिल करने के लिए उसे 268 सांसद ही चाहिए। ऐसे में दो तीन बागी सांसद के तेवर दिखाने के बाद मोदी सरकार के सेहत पर कोई असर नहीं पडने वाला है। इसके साथ ही बीजेपी के सहयोगी दलों शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4 और अन्य के 9 सदस्य हैं। इस तरह से कुल संख्या 310 पहुंच रही है। ऐसे में बीजेपी को अविश्वास प्रस्ताव से कोई परेशान होने की जरूरत नहीं है। वह आराम से सरकार को बचाने में सफल होगी।

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वैसे इस समय सरकार के घटक दलों के साथ ही अपने नाराज सांसदों की भी चुनौती रहेगीं। साथ ही भाजपा के आगामी लोकसभा चुनाव के लिए वर्तमान कई सांसदों के टिकट काटे जाने उनकी नाराजगी भी चुनौती हो सकती है लेकिन वैसे इसके भी आसार कम ही हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस बारे में व्हिप जारी कर दिया गया है लेकिन यह निश्चय है कि शुक्रवार को संसद में पेश होने वाले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जहां संसद में विपक्ष अपने पूरे तेवर में रहेगा वहीं मोदी सरकार को अपने घटक दल व अपने साथी सांसदों के विश्वसनीयता परखने का एक मौका मिल सकेगा।

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