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यदि आप इन्टर पास हैं, तो पैरामेडिकल कोर्स हो सकता है रोजगार का बेहतर जरिया

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(विजय श्रीवास्तव)
-पैरामेडिकल कोर्स वालों की यूपी में लाखों जगहें हैं रिक्त
-रोजगार परख कैरियर का विकल्प है आज पैरामेडिकल कोर्स
वाराणसी। आज देश में युवाओं के सामने बेहतर कैरियर एक यक्ष प्रश्न बन कर रह गया है। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी आज युवा भटक रहा है। कई बार अवसाद में आकर युवा आत्महत्या तक के कदम उठाने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में अभिभावकों की डयूटी बनती है कि वह उनपर ध्यान दें। उन्हें इण्टर के बाद से ही कैरियर को एक दिशा देने के लिए गाइड करने की जरूरत है। आज के दौर में नर्सिंग एंव पैरामेडिकल कोर्स युवाओं के लिए एक बेहतर कैरियर विकल्प हो सकता है। जो एक ओर जहां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती हैं वहीं दूसरी ओर समाज में एक प्रतिष्ठापरख नौकरी भी दिलाती है। पूर्वांचल के वाराणसी में स्थित मेरीडियन नर्सिंग एण्ड पैरामेडिकल काॅलेज विगत 15 वर्षो से इस क्षेत्र में अपना विशिष्ठ पहचान बना चुका है। सैकड़ों की संख्या में निकले पैरामेडिकल कोर्स कर छा़त्र जहां काफी संख्या में वाराणसी सहित प्रदेश के प्रतिष्ठित अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं वहीं कई स्वंय अपने स्तर पर पैथालाजी सहित अन्य सेवाओं के माध्यम से अपना क्लिनिक खोल कर स्वंय अपना जीवनयापन के साथ समाज में अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
मेरीडियन  नर्सिंग एण्ड पैरामेडिकल काॅलेज के निदेशक डाॅ विवेक यादव ने 24timestoday.com के न्यूज एडिटर से बातचीत में बताया कि आज पैरामेडिकल कोर्स युवाओं कें कैरियर का सबसे बेहतरीन विकल्प के रूप में  है। इन कोर्सो को करने के बाद युवाओं को भटकना नहीं पड़ता है। पैरामेडिकल कोर्स कर आसानी से गैरसरकारी के साथ सरकारी अस्पतालों में आसानी से नौकरी प्राप्त की जा सकती है। सरकारी अस्पतालों में आज के दौर में जहां उन्हें क्लास थ्री रैंक की नौकरी के समान वेतन व सुविधाएं मिल रही हैं वहीं गैरसरकारी अस्पतालों में भी उन्हें 15 से 25 हजार की नौकरी आसानी से मिल जाती है। आज सरकार जिस तरह से स्वास्थ्य सुविधाओं की तरफ ध्यान दे रही है, उससे आने वाले दिनों में लाखों की संख्या में पैरामेडिकल के छात्रों की जरूरत पड़ेगी। इण्टर के बाद ही 2 वर्षीय पैरामेडिकल कोर्स होने के कारण अपने कैरियर को एक दिशा देने में भी आसानी होती है। कुछ पैरामेडिकल कोर्स के लिए तो विज्ञान वर्ग की भी आश्वकता नहीं होती है। जिससे कम आयु में उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल जाता है।
डाॅ यादव ने बताया कि शाब्दिक अर्थो में पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल की किसी यूनिट में वह स्टाफ होता है तो उस यूनिट में उसे विशेषज्ञता प्राप्त होती है। जैसे आपरेशन थियेटर, पैथालाजी, डायलिसिस, क्रिटिकल केयर यूनिट, आप्टोमेटी यूनिट आदि। इसमें से अधिकतर कोर्स 2 वर्ष के होते हैं। इसमें से जी.एन.एम (आयुर्वेद) 3 वर्ष का पैरामेडिकल कोर्स है। पैरामेडिकल कोर्सो में डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी आज के समय का बेहरीन कोर्स है। आज अधिकतर लोग किसी न किसी अस्थि सम्बन्धित रोग से जकड़ते जा रहे हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से क्लिनिक खोल करके भी इसकी प्रैक्टिस कर सकते हैं। दो वर्षीय पाठ्यक्रम के इस कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता विज्ञान वर्ग से इण्टरमीडिएट है। इस कोर्स की फीस कुल लगभग 75 हजार रूपये हैं। जिसमें से मेधावी छा़त्रों को लगभग 60 हजार छात्रवृत्ति के रूप में सरकार वापस कर देती है। इसी तरह से डिप्लोमा इन आपरेशन थियेटर टेक्नीशियन कोर्स भी आज के समय का अच्छा पैरामेडिकल कोर्स है। इन कोर्स को करने के बाद किसी भी अस्पताल में किसी भी तरह के सर्जरी में ऐसे लोंगो की जरूरत पड़ती है। यह भी दो वर्षीय कोर्स होने के साथ इसकी भी न्यूनतम योग्यता इण्टर विज्ञान वर्ग ही है।
डाॅ यादव ने बताया कि आज हर बड़े अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा हो गयी है। जिसमें डायलिसिस टेक्नीशियन की जरूरत पड़ती हैै। ऐसे में डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नीशियन कोर्स कैरियर के लिहाज से काफी अच्छा का कोर्स है। आज ऐसे कोर्स करने वालों की काफी मांग है और उन्हें अच्छा वेतन भी मिल रहा है। इसी तरह से नेत्र सर्जनों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में डिप्लोमा इन आप्टोमेटीª कोर्स करने वालों भी मांग अच्छी है। आज प्रदेश में मांग की तुलना में डिग्रीधारी आप्टोमेट्रिस्ट बहुत कम है। ऐसे में यह कोर्स भी कैरियर के अच्छा विकल्प बन सकता है। इसी तरह से आज की चुनौती पूर्ण जीवन में आये दिन दुर्घटना, हार्टअटैक, पक्षाघात की बढ़ रही संख्या में डिप्लोमा इन क्रिटिकल केयर एण्ड ट्रामा कोर्स करने वालों के भी अच्छा कैरियर साबित हो सकता है। अगर देखा जाये तो आज इस कोर्स को करने वालों की सबसे अधिक मांग है। इसी के साथ ही आज आयुर्वेद के क्षेत्र में भी धीरे-धीरे कैरियर के रास्ते खुलते जा रहे हैं। इसमें आज जी.एन.एम(आयुर्वेद) एक बेहतर विकल्प हो सकता है। आयुर्वेद चिकित्सालयों में नियुक्ति के लिए यह एक मात्र डिग्री होती है। यह तीन वर्ष का कोर्स होता है जिसमें किसी विज्ञान वर्ग के साथ कला वर्ग के छात्र भी  इस कोर्स को कर सकते हैं। इसके पूरे पाठ्यक्रम में 1.7 लाख रूपये खर्च होते हैं। जबकि अन्य दो वर्षीय पाठ्यक्रम वालों कोर्सो की फीस दोंनो वर्षो में मिलाकर 75 हजार (रजिस्ट्रेशन, परीक्षा शुल्क अतिरिक्त) रूपये लगता है। उसमें से मेधावी छात्रों को लगभग 60 हजार रूपये छात्रवृत्ति के रूप में सरकार देती है।
डाॅ यादव ने बताया कि अपना दो हास्पिटल होने के कारण छात्रों को प्रैक्टिकल की भी बेहतर सुविधा मिल जाती है। दूरदराज के छात्रों के किए हास्टल की सुविधा भी उपलब्ध है। इस सन्दर्भ में कोई भी जानकारी प्राप्त करनी हो तो 9838501709 व 7705909071 पर प्राप्त की जा सकती है।

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