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यूपी में बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार बैकफुट पर, बैठक में समझौता, निजीकरण 15 जनवरी तक टला

विजय श्रीवास्तव
-वित्त मंत्री व ऊर्जा मंत्री की कैबिनेट उप समिति के बीच वार्ता में बनी सहमति
-कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना प्रदेश में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा
-किसी भी संविदा कर्मी, बिजली कर्मचारी, अवर अभियंता एवं अभियंता के विरुद्ध किसी प्रकार की उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं की जाएगी
-कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार समाप्त करने का किया
-कई शहरों में विद्युत व्यवस्था ठीक हुई

वाराणसी। प्रदेश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं के प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार के चलते दूसरे दि नही सरकार बैकफुट पर गयी। सोमवार से शुरू हुआ कार्य बहिष्कार मंगलवार शाम को समाप्त भी हो गया इसके साथ ही प्रदेश में ठप विद्युत व्यवस्था को कर्मचारियों ने तत्काल एक्शन लेते हुए काफी हद तक 10 बजे रात तक ठीक भी कर दिया। जिससे आमजन को काफी राहत मिली। कार्य बहिष्कार के दूसरे दिन बदले घटना क्रम में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और प्रदेश सरकार की वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की कैबिनेट उप समिति के बीच वार्ता में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की सहमति बन जाने के बाद कार्य बहिष्कार समाप्त करने का एलान किया गया। दोनों मंत्रियों और मुख्य सचिव आर. के. तिवारी की मौजूदगी में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व पावर कार्पोरेशन प्रबंधन के बीच समझौते पर दस्तख किए गए।


शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार, राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सैंथिल पांडियन व निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) ए.के. पुरवार ने समझौते पर दस्तखत किए। समझौते में कहा गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। इसके अलावा पूर्वांचल निगम के संबंध में किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
गौरतलब है कि बीती देर रात तक वार्ता में भी लगभग इन्हीं मुद्दों पर सहमति बन गई लेकिन अरविंद कुमार के समझौते पर दस्तखत करने से इन्कार कर देने की वजह से टकराव बढ़ गया था। सोमवार रात में मेें वार्ता विफल हो जाने के बाद कार्य बहिष्कार का व्यापक असर नजर आने लगा था। मंगलवार को राजधानी समेत पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति अस्त-व्यस्त रही। इसी बीच पावर आफिसर्स एसोसिएशन ने भी कार्य बहिष्कार में शामिल होने का एलान कर दिया जिससे हालात और बिगड़ गए। दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा मंत्री व शासन के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद कैबिनेट उप समिति को संघर्ष समिति से वार्ता करके गतिरोध समाप्त करने का जिम्मा सौंपा गया। कैबिनेट उप समिति के साथ वार्ता में फिलहाल पूर्वांचल निगम का निजीकरण न करने पर सहमति हो गई। समझौते में कहा गया है कि प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही बिजली सुधार के लिए कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना प्रदेश में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।


यह भी सहमति हुई है कि वितरण क्षेत्र को भ्रष्टाचार को मुक्त करने, बिलिंग व वसूली का लक्ष्य प्राप्त करने तथा उपभोक्ताओं को पूर्णतरू संतुष्ट करते हुए विद्युत उपकेंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने में संघर्ष समिति प्रबंधन का पूरा सहयोग करेगी। सुधार की इस कार्यवाही की 15 जनवरी 2021 तक ऊर्जा मंत्री, प्रबंधन व संघर्ष समिति द्वारा मासिक समीक्षा की जाएगी। समझौते में स्पष्ट लिखा गया है कि वर्तमान आंदोलन के कारण किसी भी संविदा कर्मी, बिजली कर्मचारी, अवर अभियंता एवं अभियंता के विरुद्ध किसी प्रकार की उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आंदोलन के दौरान जिन भी स्थानों पर बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं अथवा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज हुए मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाएगा। संघर्ष समिति की ओर से संयोजक शैलेंद्र दुबे, अखिलेश कुमार सिंह, वीपी सिंह, प्रभात सिंह, गोपाल बल्लभ पटेल, जय प्रकाश, माया शंकर तिवारी, सुहेल आबिद, परशुराम, प्रेमनाथ राय, डी.के. मिश्रा आदि ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बहरहाल विद्युत कर्मचारियों की यह बडी जीत है जिससे सरकार के अन्य विभागों के निजीकरण के फैसले को भी अब धक्का लगेगा। विद्युत कर्मचारियों के हौसले से निश्चित ही अन्य ऐसे विभाग सबक लेंगे जिससे अब निजीकरण के फैसले सरकार के लिए बहुत आसान नहीं होंगे।

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