वाराणसी : कुटुम्ब रजिस्टर में मृत महिला कर रही है 16 वर्ष से आगनवाणी कार्यकत्री की डयूटी

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विजय श्रीवास्तव
-वर्ष 2000 में ही जीवित महिला को दिखा दिया मृत
-बहू व अन्य सदस्यों का नाम कुटुम्ब रजिस्टर में जोडने के दौरान हुआ खुलासा
वाराणसी। क्या आपने कभी सुना है कि किसी की मृत्यु होने के एक वर्ष बाद उसकी नौकरी लग जाये और बराबर सैलरी भी उठाती रहे। यहीं नहीं इस बीच अपने लडके की शादी व घर के अन्य उत्तरदायित्व का भी निर्वहन भी करें। आप भी कहेंगे क्या मजाक करते हैं। यह मजाक नहीं बिल्कुल सच है जनाब। यह वाकया तहसील राजातालाब के भिखारीपुर गावं का है। जहां एक महिला की मृत्यु कुटुम्ब रजिस्टर में वर्ष 2000 में दिखा दी गयी। उसके एक वर्ष बाद उस महिला की आगनवाणी में नौकरी भी लगती है और आज के दिन तक वह बराबर सैलरी भी उठाती है। इतना ही  नहीं कुटुम्ब रजिस्टर में जहां उसका जन्म 1955 दिखाया गया है वहीं हाईस्कूल सर्टिफिकेट के हिसाब से उसका जन्म 1962 में हुआ है।

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श्रीमती सुमन लता भिखारीपुर, राजातालाब की निवासी हैं। उनके पति बैकुंठ लाल श्रीवास्तव की मृत्यु एक दुर्घटना में वर्ष 2000 में हो गयी थी। आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए सुमन लता ने वर्ष 2001 में आगनवाणी कार्यकत्री की नौकरी ज्वान कर ली। इस बीच अपने दो लडके व तीन लडकियों की शादी विवाह भी किया। पिछले सप्ताह जब उनके पुत्र रोहित श्रीवास्तव कुटुम्ब रजिस्टर में अपने पत्नी व बच्चों का नाम दर्ज करने के लिए एसडीएम द्वारा आदेशित हलफनामा को लेकर सेके्रेटरी शंकर शरन दूबे के पास जब पहुंचा तो कुटुम्ब रजिस्टर पर अपने दादा, दादी व पिता के के साथ ही उसकी जीवित माॅ को भी वर्ष 2000 में मृत दर्ज दर्शाया गया है। इस पर जब उसने सेकेटरी से कहा कि उसकी माॅ तो जिन्दा हैं और आगनबाणी में कार्यकत्री हैं। इस पर उस समय के सेक्रेटरी का हवाला देते हुए श्री दूबे ने कहा कि इसमें मैं क्या कर सकता हूॅ। इस पर जब रोहित ने कुटुम्ब रजिस्टर की पक्की नकल मांगी तो उसपर भी आना कानी की जा रही है। गौरतलब है कि कुटुम्ब रजिस्टर एक ऐसा सरकारी दस्तावेज है जो उस किसी व्यक्ति के जीवित व मृत्यु के साथ ही उसके निवास स्थल के बारें में सबसे पुख्ता जानकारी देता हैं लेकिन प्रधान व सेक्रेटरी की लापरवाही के चलते कुटुम्ब रजिस्टर आज किसी जीवित को मृत तो किसी मृत को जीवित दिखा दिया जाता है। इतना ही नहीं कि उम्र के वर्ष में 5 से 10 वर्ष का अन्तर तो मामूली है। इसके साथ ही नाम का गडबड झाला अलग से है। अधिकतर लोंगो के नाम में त्रुटियाॅ हैं। गांववालों का कहना है कुटुम्ब रजिस्टर में इस तरह जीवित व्यक्ति को मृत दिखा कर कई बार उसके जमीन पर असामाजिक तत्व कब्जा तक कर डालते हेंै। इस की गंभीरता की जांच होने चाहिए।
इस सन्दर्भ में जब सेके्रटरी शंकर शरन दूबे से बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि हाॅ इस सन्दर्भ में उक्त महिला के पुत्र ने सम्पर्क किया था। कहा कि वर्ष 2000 में जो सेके्रटरी थे इस समय उनकी मृत्यु हो चुकी है। चूकि यह उनके समय का मामला है। इस सन्दर्भ में जांच की जायेगी। इस सन्दर्भ में एडी पंचायत से सम्पर्क करने की कोशिश की गयी तो उनका फोन नहीं मिल सका।

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