Breaking News

वाराणसी: कोरोना के नाम पर अस्पताल से शमशान तक मनमाना वूसली

विजय श्रीवास्तव
-रेट निर्धारण न होने से अस्पताल संचालक बेड, दवा, आक्सीजन के नाम पर मनमाना वसूल कर रहे हैं
-सेवा के नाम पर चलने वाले एम्बुलेंस कोरोना मरीजों से 5-5 हजार तक की वसूली
-घाटों पर शव में अग्नि देने के नाम पर भी भी जमकर हो रही वसूली
-आपदा को अवसर में तब्दील करने में लगे है तथाकथित लोग

वाराणसी। किसी ने सही ही कहा है कि कुछ लोग आपदा में भी अवसर तलाश लेते हैं। यह पंक्तियां आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पूरी तरह से सटीक बैठ रही है। जहां आज अस्पताल से शमशान तक कुछ लोग आपदा को अवसर में तब्दील कर अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि अस्पताल व शमशान आने वाला हर व्यक्ति अमीर ही नहीं गरीब भी होता है। कोरोना के नाम पर जहां अस्पताल पूरी तरह से इलाज के नाम पर लोंगो को मनमानी वसूलने में लगे हैं वहीं शमशान पर भी शवों के अंत्येष्ठि करने पर भी जमकर लूटपाट मची है। केन्द्र, प्रदेश व जिला प्रशासन गाइडलाइन भी कागजों पर आदेश तक ही सीमित रह गयी हैं। गाइड लाइनों का कितना पालन हो रहा है इससे किसी को कोई सरोकार नहीं है। कोई रेट निर्धारित न होने के कारण अधिकतर अस्पताल से लेकर शमशान तक मनमाना वसूला जा रहा है जिससे आमजन परेशान व बेहाल है।


कोरोना महामारी ने आज पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। भारत में भी आज कोरोना पूरी तरह से बेकाबू हो गया है। इसके लिए जहां जनता अगर दोषी है तो उससे कहीं भी कम हमारी सरकारें, कोर्ट व चुनाव आयोग नहीं हैं। छोटी-छोटी बातों को संज्ञान में लेने वाली हमारें कोर्ट को आज यह हालात कैसे नहीं दिख रहे हैं। यह समझ से परें हैं। आज जहां पीएम मोदी के ससंदीय क्षेत्र वाराणसी में लोग बेड, चिकित्सा, आक्सीजन यहां तक मरने के बाद शव को जलाने में जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं कल यानि सोमवार को पंचायती राज का चुनाव होने जा रहा है। प्रदेश सरकार कितना संवेदनशील है कि रविवार को सम्पूर्ण लाॅकडाउन लगाती है वहीं सोमवार को पंचायती चुनाव होने जा रहा है। एक ओर कोरोना के चेन तोडने की बात वहीं दूसरी ओर भीड जुटा कर चेन बनाने की बात।
आज वाराणसी के जो हालात हैं वह किसी से छुपे नहीं हैं। आज न तो लोंगो को समुचित इलाज मिल रहा है और नहीं अस्पतालों में बेड। आक्सीजन अगर किसी को मिल गया तो समझिए कि कुछ पुण्य का ही प्रताप है। आक्सीजन और बेड के बदले अस्पताल धन उगाहने में लगे हैं। जिला प्रशासन ने वाराणसी में कई निजी अस्पतालों में भी कोविड-19 के इलाज के लिए सूचीबद्ध किया है लेकिन अधिकतर निजी अस्पताल आज सेवा भाव को ताक पर रख कर पूरी तरह से कोरोना पीडितों से धन उगाही में लगे हैं। कई अस्पतालों में तो 1 से 2 लाख रूपये तक जमा कर इलाज शुरू होने की खबरें मिल रही हैं। अधिकतर ऐसे अस्पतालों की हालत यह है कि उनके फोन नहीं उठ रहे हैं। यही स्थिति अन्य प्राइवेट अस्पतालों की भी है वह भी आपदा को अवसर में भुनाने में लगे हैं। समय पर आक्सीजन न मिलने के कारण कई लोगों की असमय मौत हो चुकी है। प्रशासन समय-समय पर अस्पतालों, डाक्टरों के साथ कोरोना सम्बन्धी दवा, आक्सीजन प्राप्त करने के नम्बर सोशल मीडिया व प्रिन्ट मिडिया पर उपलब्ध कराती रहती है लेकिन पहले तो इनके नम्बर नहीं उठते है लेकिन जब कभी-कभी कोई फोन उठाता है और क्या परेशानी है की बात करता है तो लगता है कि अब उसके मरीज की जान बच जायेगी लेकिन क्षण भर में उसकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है क्योंकि जवाब होता है कि अभी दवा, बेड व आक्सीजन उपलब्ध नहीं है और धन्यवाद कह कर फोन कर कट जाता है।


इतना ही अगर किसी तरह पहुंच, पैसा वह सही इलाज के चलते आप बच जाते हैं तो भगवान का ही शुक्र है और अगर मरीज ने कोरोना के आगे हार मान कर दम तोड दिया तो उसकी तो मुक्ति लेकिन फिर उसके परिजनों की दुर्दशा शुरू हो जाती है। कोरोना मरीज को चाहे अस्पताल पहुचाना हो या उसके शव को घाट। दोंनो स्थिति में परिजनों के साथ जमकर लूटपाट हो रही है। सेवा के नाम पर चलने वाले एम्बुलेंस आज खुलेआम लूट रहे हैं। कोरोना मरीज को अस्पताल पहुचाना हो या उसके शव को घाट। एम्बुलेंस वाले कोरोना पेंसेट के नाम पर 2 हजार से 5 हजार रूपये तक जबरन बसूल रहे हैं। तारिफ की बात यह है कि एम्बुलेंस के लिए सरकार उनसे पंजीयन सहित अन्य टैक्स भी नहीं लेती है बावजूद इसके एम्बुलेंस आज खुलेआम अस्पताल मालिकान के संरक्षण व प्रशासन के नाक के नीचें खुलेआम लूटपाट कर रहे हैं। कोरोना मरीजों से लूटपाट यहीं नहीं खत्म नहीं होती है। घाट पर पहुचने के बाद शव जलाने के नाम पर भी जमकर लूटपाट हो रही है। हरिश्चन्द्र घाट, मर्णिकाघाट के साथ ग्रामीण क्षेत्र में सरायमोहाना में भी शव को आग देने के नाम पर 1-5 हजार की मांग की जा रही है। लकडियों के लिए भी मनमाना कीमत वसूल की जा रही है। भेलूपुर पुलिस ने देर से ही सही सराहनीय पहल दिखाते हुए रेट निर्धारित कर दिया है लेकिन प्रश्न वहीं है कि इसका पालन कितना हो पाता है। वैसे ऐेसा भी नहीं है कि पुलिस, प्रशासन चाह ले तो इस तरह की हो रही अराजकता व लूटपात को पूरी तरह से रोका जा सकता है जिससे कोरोना मरीज व उनके परिजनों को काफी सहुलियत होगी। इसके साथ ही अस्पतालों के बेड, आक्सीजन, एम्बुलेंस के रेट भी अगर जिला प्रशासन प्रिन्ट मिडिया व सोशल मिडिया पर प्रसारित कर दे ंतो निश्चय ही कोरोना मरीजों व उनके परिजनों को बहुत ही लाभ मिल सकेगा।

Share

Related posts

Share