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वाराणसी : जब बेटी व बहुओं ने दिया माँ की अर्थी को कंधा

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विजय श्रीवास्तव
-95 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने मरणोपरांत किया नेत्रदान’
-माँ की.अन्तिम इच्छा का किया मैंने सम्मान: बेटी
-महिला के दो पुत्रों ने कहा कि मुझे अपनी बहन पर गर्व है
वाराणसी। परंपराओं को तोडने की ताकत बहुत कम लोगों में होती है। अधिकतर लोग चली आ रही परंपराओें पर ही चलना पसंद करते हैं लेकिन ऐसे लोग जो इन परंपराओं को तोडतें हैं  वे समाज में एक लम्बी लकीर खीचते हेैं और समाज के लिए एक सन्देश छोड जाते हैं जिसे लोग लम्बे समय के लिए याद करतेे हैै। हाॅ ऐसा कुछ चिरईगांव विकास खंण्ड के बरियासनपुर गाँव मे रविवार को देखने को मिला। जब एक बुजुर्ग महिला सन्तोरा देवी (95वर्ष) के निधन के बाद उसकी इकलौती बेटी पुष्पावती पटेल ने अपनी माँ की अर्थी को न सिर्फ कंधा दिया वरन् घर की बहुओं व अन्य महिलाओं ने भी अर्थी को कंधा दिया। काफी दूरी तक शवयात्रा में शरीक भी हुई। इतना ही नहीं मरणोपरांत बुजुर्ग महिला ने नेत्रदान कर अपना संकल्प भी पूरा किया।

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गौरतलब है कि बरियासनपुर गाँव मे बुजुर्ग महिला सन्तोरा देवी के पति का निधन 20 वर्ष पहले ही हो चुका थां। पति के निधन के बाद ही महिला ने नेत्र दान करने का संकल्प ले लिया। उसी समय महिला ने यह भी संकल्प ले लिया था कि मेरी अर्थी को कंधा मेरी इकलौती बेटी ही देगी। जिससे समाज का यह मिथक टूट सके कि बेटा ही अर्थी को कंधा दे सकता है। साथ ही किसी को बेटा न होने पर उसे दुख या मलाल न रह जाय। ऐसा नहीं उसके बेटे नहीं है बरन् उसकी एक बेटी के साथ ही उसके दो बेटे भी हैं।

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आज जब माॅ के निधन के बाद बेटी पुष्पावती ने माॅ के संकल्प का हवाला देकर कंधा देने का अपना निर्णय सुनाया तो सभी चैक पडें। मृतक महिला के दो पुत्र व लोगों ने सामाजिक मर्यादाओं की दुहाई देते हुए उसे समझाने का काफी प्रयास किया लेकिन लड़की की जिद के आगे लोगों की एक न चल सकी। अन्ततः वही हुआ जो बेटी पुष्पावती ने ठान लिया था, मृतक महिला की लडकी ने सभी सामाजिक नियमों ,बंदिशों व मर्यादाओं को दरकिनार करते हुए मृतक महिला की बहुओं व अन्य पड़ोसी महिलाओं के सहयोग से माँ की अर्थी को कंधा दिया और शव यात्रा भी निकाली। यह शव यात्रा बरियासनपुर गाँव से निकलकर पुलिस चैकी से होते हुए लगभग एक किलोमीटर आगे चिरईगाँव ब्लाक मुख्यालय तक गयी। तत्पश्चात लोंगांे के समझाने के बाद गाँव के लोगों ने शव यात्रा को आगे बढ़ाया व सरायमोहाना घाट पर अन्तिम संस्कार किया गया। इस दौरान मरणोपरांत बुजुर्ग महिला ने नेत्रदान कर अपना संकल्प पूरा किया।

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इस सम्बन्ध मे मृतक महिला की इकलौती बेटी पुष्पावती का कहना था कि मैने सिर्फ अपनी माँ की अन्तिम इच्छा का सम्मान किया। मुझे सामाजिक नियमों, रीति-रिवाजो व बंदिशों से कोई लेना देना नही है। मृतक महिला के दोनो बेटों बाबूलाल व त्रिभुवन नारायण पटेल का कहना है कि जहाँ एक ओर मेरी माँ द्वारा मरणोपरांत नेत्र दान किये जाने पर हमे गर्व है वही दूसरी ओर हमे अपनी बहन पर भी नाज है कि उसने माँ की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए सामाजिक मर्यादाओं, नियमो व बंदिशों की कोई परवाह नही की ।
बुजुर्ग महिला की शव यात्रा मे महिला की तीनो बहुएं प्रभावती, अमरावती, कलावती के साथ ही गाँव की कुसुम, शशिदेवी, आरती, इंदु, सहित दर्जनो की संख्या मे महिलाओं के साथ ही ग्राम प्रधान देवराज पटेल, वालकिशुन पटेल आदि सैकडों लोग शामिल रहे।

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