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वाराणसी: डॉक्टर की लापरवाही से छह लोगों के आंखों की रोशनी गयी, मारवाड़ी हिंदू अस्पताल की घटना

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विजय श्रीवास्तव
-स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच कर करेंगी इलाज
-अब अस्पताल प्रबन्धन अपने खर्च पर करेगा इलाज
-पुलिस कर रही है अस्पताल प्रबन्धन से पूछताछ
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में डाक्टरों की घोर लापरवाही से छह लोंगो की आखों की रोशनी चली गयी। गलत ढंग से आपरेशन के चलते बेहतर रोशनी की उम्मीद में आये इन छह लोंग अब पूरी तरह से गहरें सदमें में हैं। सबसे बडी बात यह है कि इसमें से अधिकतर लोग गरीब तबके के हैं। अगर इनकी आॅख ठीक नहीं हुई तो इनके तथा इनके परिजनों के सामने रोजी रोटी की समस्या खडी हो जायेगी। बनारस के मारवाड़ी अस्पताल में आंखों में रोशनी की उम्मीद लेकर आए छह लोग गहरे सदमे में हैं।

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आपरेशन के दो-तीन दिन बीतने के बाद भी जब आपरेशन कराये लोंगो के आखों की रोशनी नहीं लौटी तो पीड़ितों के साथ-साथ परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। आसपास के क्षेत्रों में जब इसकी भनक लगी तो मारवाडी अस्पताल में भारी भीड जुट गयी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान दर्ज कर उन्हें किसी तरह से समझा कर शान्त किया। अस्पताल प्रबंधन ने पीड़ितों और पुलिस को आश्वासन दिया कि वह पीड़ितों का पूरा इलाज अपने खर्चे पर कराएंगे। गौरतलब है कि विगत तीन दिन पूर्व छह मरीजों के आंख का आपरेशन हुआ था। 24 घंटे बाद भी जब उनके आखों की पट्टी खोली गयी तो उन्हें कुछ नहीं दिखाई दिया। जिससे वे परेशान हो गये। इससे डाक्टरों के भी होश उड गये। देखते-देखते पांच अन्य लोंगो की भी यही स्थिति देख कर उनके परिजन हंगामा करने लगें जिसपर शुक्रवार की शाम को ही पुलिस पहुंच अस्पतला प्रबन्धन के बातचीत की। परिजनों के हंगामा करने के बाद डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए। जिससे अन्य मरीजों की ड्रेसिंग भी प्रभावित हुई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दूसरे चिकित्सक और कर्मियों को बुलाकर दवा और ड्रेसिंग का किसी तरह से प्रबंध किया।

 

 

 

 

 

 
जानकारी के ओटी बन्द कर दी गयी है। इस दौरान अस्पताल प्रबन्धन मरीजों की जांच करा रहा है और आज रिपोर्ट आने के बाद आगे इलाज किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन अपने पूरे खर्चे पर मरीजों का इलाज कराएगा और इसमें कोई लापरवाही नहीं होगी।
अस्पताल में आपरेशन कराने पहुचे चंदौली निवासी त्रिवेणी के परिजनों ने बताया कि त्रिवेणी के आंखों में कुछ समय से दिक्कत हो रही थी। हमने यहां दिखाया। डॉक्टर ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने को बोला। 12 को जब ऑपरेशन के बाद पट्टी खुली तो आंखों के आगे अंधेरा ही अंधेरा था। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया था कि 24 घंटे में सही हो जाएगा लेकिन 72 घंटे बीत चुके हैं। अब तो कुछ भी दिखाई ही नहीं दे रहा है। ऑटो चलाकर अपने पांच बच्चों और पत्नी की परवरिश करते हैं। उनकी बड़ी चिंता बच्चों की शिक्षा और लालन-पालन की है। इसी तरह से बिहार के बक्सर जिले के यज्ञ नारायण, मिर्जापुर की पार्वती देवी, जौनपुर की वंदना, नवाबगंज की अख्तरी बेगम और कोनिया की मालती देवी का आपरेशन करने के बाद से अभी तक उनके आंखों के सामने अंधेरा ही है। उनके परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है।

 

 

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